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संभल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्धमान नदी में एक बार फिर जलधारा बहने लगी। करीब 15 से 20 वर्षों बाद पहली बारिश में नदी में पानी आने से प्रशासन और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ‘एक जनपद-पांच नदियां’ अभियान के तहत जल संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चलाए जा रहे पुनर्जीवन अभियान को यह बड़ी सफलता माना जा रहा है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि लगभग 14.5 किलोमीटर लंबी वर्धमान नदी के मार्ग पर वर्षों से अतिक्रमण होने के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था। तहसील प्रशासन, सिंचाई विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से नदी की खुदाई कराई गई। इसका परिणाम यह रहा कि मानसून की पहली ही बारिश में नदी में फिर से पानी दिखाई दिया। 8.5 किलोमीटर तक हुई खुदाई, शेष काम जारी डीएम ने बताया कि अब तक करीब 8 से 8.5 किलोमीटर क्षेत्र में खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है, जहां पानी भी पहुंच गया है। अंतिम 3 से 4 किलोमीटर क्षेत्र में कार्य तेजी से कराया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्य पूरा होने के बाद नदी सालभर जलयुक्त रहेगी। जिले की अन्य नदियों के पुनर्जीवन के लिए भी इसी तरह की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बबराला झील से निकलकर महावा नदी में मिलती है वर्धमान करीब 14.5 किलोमीटर लंबी वर्धमान नदी बबराला झील से निकलती है और ब्लॉक गुन्नौर एवं जुनावई के कई गांवों से होकर बहती है। यह बाघऊ, चुहेली (गुन्नौर हीरापुर), नूरपुर, अकबरपुर, गुन्नौर सेमला, सिरौरा काजी, महमूदपुर और बहलोलपुर होते हुए भोजपुर ग्राम पंचायत में महावा नदी में मिल जाती है। प्रशासन पूरे कैचमेंट एरिया को अतिक्रमण मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप बहाल करने की दिशा में काम कर रहा है। नदी किनारे होगा पौधरोपण वृक्षारोपण अभियान के दौरान वर्धमान नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे तटबंध मजबूत होंगे, मिट्टी का कटाव रुकेगा और नदी के संरक्षण में मदद मिलेगी। 5 जून से शुरू हुआ था पुनर्जीवन अभियान वर्धमान नदी के पुनर्जीवन अभियान की शुरुआत जून 2026 में हुई थी। बाघऊ गांव के पास नदी के कैचमेंट क्षेत्र में ग्राम समाज की भूमि पर बने अवैध निर्माण को हटाकर नदी की मूल धारा को बहाल किया गया। इसके बाद 6 जून को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण विश्नोई ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अभियान का शुभारंभ किया था। तब से राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभाग युद्धस्तर पर नदी के पुनरुद्धार का कार्य कर रहे हैं।
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