
पंजाब कांग्रेस में जारी गुटबाजी को थामने के इरादे से आए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की कोशिशें पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। बघेल ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ मिलकर 9 दिनों में 18 ताबड़तोड़ रैलियां और बैठकें कीं।
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इन कार्यक्रमों में संगठन को मजबूती मिलने के बजाय अंदरूनी कलह और खुलकर सामने आ गई। लगभग हर रैली में जमीनी स्तर के कार्यकर्ता आपस में भिड़ते रहे, धक्कामुक्की और नारेबाजी का दौर चलता रहा। जबकि, प्रभारी बघेल पूरे मामले पर मूकदर्शक बने रहे।
उन्होंने एक बार भी आक्रोशित कार्यकर्ताओं को रोकने या समझाने की पहल नहीं की। जहां बघेल के पिछले दौरे में केवल शीर्ष नेतृत्व और कद्दावर नेताओं के बीच खींचतान दिख रही थी, वहीं इस 9 दिवसीय दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि गुटबाजी अब ब्लॉक और बूथ स्तर के वर्करों तक गहराई से जड़ें जमा चुकी है।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रभारी के सामने ही गुटबाजी का टॉप से बॉटम तक पहुंचना पार्टी के सांगठनिक ढांचे को कमजोर कर चुका है, जो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की राह को कठिन और आत्मघाती बना सकता है।

मलेरकोटला में आपस में लड़ते कांग्रेसी और उन्हें छुड़ाते हुए पुलिस अधिकारी।
जानिए, कांग्रेस की रैलियों का एक्सपर्ट व्यू
- बूथ मजबूत नहीं कमजोर कर गए: सीनियर जर्नलिस्ट व पॉलिटिकल एक्सपर्ट अश्वनी जेटली का कहना है कि हाईकमान ने बघेल को बूथ मजबूत करने के लिए भेजा था, लेकिन बूथ मजबूत होने के बजाय वह बूथों को कमजोर कर चले गए। 9 दिन में 18 रैलियां हुईं और हर रैली में चन्नी और वड़िंग के समर्थक आमने-सामने हुए।
- मालवा में गया गलत मैसेज: अश्वनी जेटली का कहना है कि मालवा में 69 सीटें हैं और इस दौरे में बघेल व राजा वड़िंग ने सभी 69 सीटों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं। हर बैठक में कार्यकर्ताओं के आपस में भिड़ने से पूरे मालवा में यह मैसेज चला गया कि कांग्रेस के नेता कुर्सी के लिए आपस में लड़ते हैं। ऐसे में जो आम मतदाता है वह पार्टी से दूर जा सकता है। कांग्रेस ने अब भी समय रहते सब कुछ ठीक नहीं किया तो चुनाव में इसके गंभीर परिणाम निकल सकते हैं।

- बघेल ने नहीं अपनाया न्यूट्रल रोल: पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट वैवस्वत वेंकट का कहना है कि भूपेश बघेल पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हैं और उन्हें न्यूट्रल रोल अपनाना चाहिए था। दूसरे दिन जब पटियाला और संगरूर में कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़े तो भूपेश बघेल मंच पर बैठकर चुपचाप सब कुछ देखते रहे। बघेल अगर उसी दिन दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं से बातचीत करते तो शायद आगे इस तरह की बातें नहीं होतीं।
- वर्कर्स को एकजुट नहीं किया: वैवस्वत वेंकट का कहना है कि लुधियाना बैठक में भारत भूषण आशू के समर्थकों ने नारेबाजी की और वे सभी टकसाली कांग्रेसी थे। राजा वड़िंग ने उन पर RSS का टैग लगा दिया। वेंकट कहते हैं कि राजा वड़िंग ने लुधियाना से MP का चुनाव लड़ा और शहर की ज्यादातर सीटों पर पीछे रहे। वड़िंग को चाहिए था कि शहर में पार्टी में जो गैप है उसे दूर करते, लेकिन उनके जीतने के बाद लुधियाना कांग्रेस सीधे-सीधे दो गुटों में बंट गई। लुधियाना पूरे पंजाब की पॉलिटिकल नेरेटिव सेट करता है।
- समर्थकों की नारेबाजी पर चन्नी को फटकार: शुरुआती बैठकों में चन्नी के समर्थकों ने नारेबाजी की तो हाईकमान ने चन्नी को दिल्ली में तलब कर दिया। केसी वेणुगोपाल ने चन्नी को फटकार लगाई और कहा कि बैठकों में नारेबाजी तुरंत रुकवाएं। उन्होंने चन्नी को कहा कि 10 से 15 दिन का इंतजार करें, पार्टी कोई बड़ा फैसला ले रही है। इसके बावजूद चन्नी के समर्थक हर बूथ कांग्रेस मजबूत के कार्यक्रमों में नारेबाजी करते रहे। वेंकट का कहना है कि हाईकमान की फटकार के बाद भी नारेबाजी होना कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं में राजा वड़िंग व भूपेश बघेल के खिलाफ रोष दिखाता है।

- राजा वड़िंग से ज्यादा खिलाफत बघेल की: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि राजा वड़िंग और चन्नी गुट काफी समय से आमने-सामने हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं का एक-दूसरे के पक्ष में नारेबाजी करना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि वर्कर्स ने भूपेश बघेल के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ-साथ ‘गो बैक भूपेश बघेल’ के पोस्टर, बैनर लगाए। लुधियाना में तो कार्यकर्ताओं ने हद कर दी। वे टी-शर्ट पर ‘बघेल गो बैक’ लिखकर आए और मीटिंग के दौरान लहराते रहे।
- राजा वड़िंग खुद को पावरफुल जताते रहे: प्रमोद बातिश का कहना है कि राजा वड़िंग इस पूरे दौरे में खुद को पावरफुल शो करते रहे। यहां तक कि मंचों पर टिकट किसे देना है और किसे नहीं देना, इस पर भी टिप्पणी करते रहे। इससे दूसरे गुट के नेता नाराज रहे। दरअसल, जिला स्तरीय बैठकों में चन्नी गुट के नेताओं को अप्रत्यक्ष तौर पर पार्टी के साथ धोखा करने वाला बताया गया। उनका कहना है कि नौ दिन में 18 रैलियों में राजा वड़िंग के निशाने पर पंजाब सरकार कम और अपनी पार्टी के नेता ज्यादा रहे।
- धर्मवीर गांधी ने दी हाईकमान को नसीहत: राजा वड़िंग और भूपेश बघेल की खिलाफत होने पर पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने भी हाईकमान को नसीहत दी कि इस गुटबाजी को अभी रोक लें। जैसे-जैसे दिन बीतेंगे, गुटबाजी और खतरनाक लेवल पर पहुंच जाएगी। प्रमोद बातिश का कहना है कि हुआ भी ऐसा ही। नारेबाजी से लेकर मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

- चन्नी समर्थकों ने दिखाई ताकत: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने बघेल को कहा था कि ग्राउंड लेवल पर चरणजीत सिंह चन्नी की ताकत को देखकर आएं, ताकि विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी कोई अहम फैसला ले सके। चन्नी समर्थकों ने बघेल को चन्नी की ताकत दिखा दी कि वे अपने नेता की तरह हाईकमान की परवाह नहीं करते हैं। उनका कहना है कि बघेल चरणजीत चन्नी की ताकत का आंकलन करने के बजाए राजा वड़िंग खेमे में ही खड़े दिखे।
- चन्नी-बाजवा-रंधावा से रहे दूर: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 9 दिन के इस दौरे में भूपेश बघेल ने एक बार भी चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ मुलाकात नहीं की। पूछने पर कहने लगे कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से मालवा में था, इसलिए संबंधित जिलों के नेताओं को ही बुलाया गया।

राजा वडिंग और बघेल की भूमिका का विश्लेशण करेगा हाईकमान
पंजाब कांग्रेस की बैठकों में हुई नारेबाजी और हाथापाई को लेकर हाईकमान भी सख्त है। हाईकमान चरणजीत सिंह चन्नी को पहले ही फटकार लगा चुका है और अब राजा वड़िंग व बघेल की भूमिका का भी विश्लेषण करेगा। बघेल व राजा वड़िंग दिल्ली में 9 दिन की पूरी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद राहुल गांधी बड़ा फैसला ले सकते हैं।


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बघेल-वड़िंग के सामने मंच पर कांग्रेस नेता भिड़े:मलेरकोटला में पूर्व मंत्री के समर्थकों ने पूर्व MLA को आने से रोका, पुलिस ने डंडे दिखाए

पंजाब में कांग्रेस के ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के आखिरी दिन शनिवार को मलेरकोटला में स्टेज पर चढ़ने के लिए कांग्रेस नेता आपस में भिड़ गए। पूर्व MLA जसवीर सिंह जस्सी उर्फ जस्सी खंगूड़ा जब स्टेज पर चढ़ने लगे तो पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना के पक्ष के कांग्रेस नेताओं ने उन्हें स्टेज पर चढ़ने से रोक दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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लखनऊ में शनिवार रात ‘दावत ए सुख़न’ मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। महफिल में देश के अलग अलग हिस्सों से एक दर्जन से अधिक शायर और कवियों ने हिस्सा लिया। मंच पर भारतीय संस्कृति और साहित्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। कलमकारों ने अपनी रचनाओं से लोगों को बेहद प्रभावित किया । दर्शकों को वाह – वाह कहने पर मजबूर कर दिया। हिस्सा लेने वाले कवि और शायर इस अवसर पर नदीम फर्रूख़ , हसन काज़मी , वासिफ फ़ारूक़ी , शबीना अदीब , सर्वेश अस्थाना , जौहर कानपुरी , प्रियांशु गजेंद्र , हेमंत पांडे , शंभू शिखर समेत विभिन्न कवियों ने शेर सुनाये। कार्यक्रम में शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा। हास्य, व्यंग्य, गजल, गीत और कविताओं के रंगों से सजी इस महफिल में साहित्य प्रेमियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कविता और शायरी की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ समाज में आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करने का संदेश दिया। मुशायरे में पढ़े गए शेर… अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए दूसरों के लिए आंख नम कीजिए कुछ गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे आप अपनी जरूरत को कम कीजिए शबीना अदीब
फूल सबके लिए महकते हैं लोग लेकिन कहाँ समझते हैं ज़िंदगी जी रहे हैं हम फिर भी ज़िंदगी के लिए तरसते हैं डॉ. सोनरूपा
उसको खिलाये बिन मैं कुछ भी खाता नहीं हूँ और घूम मैं अकेले भी तो पाता नहीं हूँ ऊंचाइयों से गिरने लगे जबसे हैं पति पत्नी के साथ छत पे भी मैं जाता नहीं हूँ शंभू शिखर
मैं तेरी आँख में आंसू की तरह रहता हूं जलते बुझते हुए जुगनू की तरह रहता हूं सब मेरे चाहने वाले हैं मेरा कोई नहीं मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूं हसन काज़मी
बस्ती के इक बुजुर्ग की मय्यत को देख कर मैं अपने बूढ़े बाप से जाकर लिपट गया जौहर कानपुरी
रिश्तों में तकरार बहुत है लेकिन इनमें प्यार बहुत है सारी दुनिया खुश रखने को बस अपना परिवार बहुत है सर्वेश अस्थाना
उसने भी सबके साथ मिरी की मुखालिफ़त जिसके लिए मैं सारे जमाने से लड़ गया नदीम फ़र्रुख़
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40 मिनट पहले
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देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान Gen Z को भटकाने की कोशिश की गई थी।
भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने अपने इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी से मिलकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
उन्होंने कहा, “भारत में हर साल कम से कम 2 करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले 10 साल में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी आकांक्षाएं हैं और वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे। मेरे लिए मंत्री पद महत्वपूर्ण नहीं था।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

प्रधान के बयान की प्रमुख बातें…
नवीन पटनायक पर निशाना साधा- प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि BJD कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और उनके नारे लगाए जाने से वे परेशान नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “मैं किसान का बेटा हूं। आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी मैं वापस आऊंगा।”

उन्होंने कहा, “मैंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया। जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक मुझ पर जताए गए भरोसे को नहीं तोड़ूंगा और ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिससे ओडिशा के गौरव और स्वाभिमान को ठेस पहुंचे।”
भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से मंत्री बना- प्रधान ने कहा कि वह 12 साल पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बने थे।
पीएम की मंजूरी के बाद इस्तीफा- प्रधान ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने के लिए उनकी मंजूरी मांगी। प्रधानमंत्री सहमत हुए और बाद में युवाओं से बातचीत भी की। फिर मैंने इस्तीफा दिया।”
नई पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश हुई- प्रधान ने कहा, “हाल में हुई घटनाओं से पता चलता है कि कुछ लोगों ने जेन जी को गुमराह करने की कोशिश की। जेन जी कौन हैं? मेरा मानना है कि वे हमारे अपने हैं। यह कभी मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं था।”

कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र, उसी मुद्दे पर इस्तीफा

1997 में पेपर लीक प्रदर्शन में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। उनको बुरी तरह पीटा गया था। चेहरे पर चोटें भी आईं थीं। -फोटो क्रेडिट:TNIE
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।


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यूपी के बरेली में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों ने उसकी पत्नी और एक युवक समेत चार लोगों पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि पत्नी के एक युवक से कथित प्रेम संबंध थे। पति ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था और इसका विरोध किया था। इसके बाद आरोपी पत्नी और उसके कथित प्रेमी ने अन्य लोगों की मदद से युवक को पकड़कर जबरन तेजाब पिला दिया। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान जोगी नवादा निवासी इसराइल पुत्र सुफा के रूप में हुई है। घटना थाना बारादरी क्षेत्र की बताई जा रही है। मृतक के भाई मोहम्मद ताजिम ने पुलिस को दी गई तहरीर में पत्नी गौसिया, मोहम्मद सलीम पुत्र कुन्दू निवासी काकर टोला और दो अन्य लोगों असार तथा इकरार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पत्नी के कहने पर बेचा था अपना हिस्सा
परिजनों के मुताबिक इसराइल और उसकी पत्नी गौसिया पिछले कुछ समय से अलग-अलग जगह किराए पर रह रहे थे। मृतक के भाई मोहम्मद ताजिम का कहना है कि करीब ढाई साल पहले इसराइल ने पत्नी के कहने पर अपने घर का हिस्सा बेच दिया था। इसके बाद वह काकर टोला में मोहम्मद सलीम के मकान में किराए पर रहने लगा था।
परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान गौसिया और मकान मालिक सलीम के बीच कथित तौर पर संबंध बन गए। कुछ समय बाद इसराइल को पत्नी और सलीम के संबंधों के बारे में जानकारी हुई। पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखने का आरोप
मृतक के भाई ने आरोप लगाया है कि 27 जुलाई 2026 को इसराइल ने अपनी पत्नी गौसिया को मोहम्मद सलीम के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद उसने विरोध किया और मकान खाली कर दिया। वह काकर टोला में ही अब्दुल के घर में किराए पर रहने लगा। तहरीर के मुताबिक, मकान बदलने के बाद भी सलीम कथित तौर पर इसराइल की गैरमौजूदगी में गौसिया से मिलने आता-जाता था। इसराइल ने इसका विरोध किया। परिजनों का आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने इसराइल को रास्ते से हटाने की साजिश रची। रात में पकड़कर जबरन तेजाब पिलाने का आरोप
मृतक के भाई ने बताया कि 7 अगस्त 2026 की रात इसराइल के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि गौसिया और मोहम्मद सलीम ने असार तथा इकरार की मदद से इसराइल को पकड़ लिया और उसके मुंह में जबरन एसिड डाल दिया। तेजाब पिलाए जाने के बाद इसराइल की हालत बिगड़ने लगी। परिवार के लोग इसराइल को खुश्लोक अस्पताल, स्टेडियम रोड लेकर पहुंचे। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भाई बोला- किसी से कोई रंजिश नहीं थी
मृतक के भाई मोहम्मद ताजिम ने बताया कि उसके भाई की किसी से व्यक्तिगत रंजिश नहीं थी। उसका आरोप है कि विवाद की मुख्य वजह उसकी पत्नी और सलीम के बीच कथित संबंध थे।
ताजिम के मुताबिक, इसराइल ने अपनी पत्नी को सलीम के साथ देख लिया था। इसके बाद उसने इसका विरोध किया था। परिवार का आरोप है कि इसी विरोध के चलते उसकी हत्या कर दी गई। मां ने भी लगाए गंभीर आरोप
मृतक की मां बरीशा ने भी घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके चार बेटे हैं और इसराइल की शादी करीब 13 साल पहले हुई थी। इसराइल कबाड़ की फेरी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसका एक बेटा भी है। बरीशा का आरोप है कि इसराइल ने अपनी पत्नी और सलीम के कथित संबंधों को देख लिया था। इसके बाद परिवार में विवाद की स्थिति बनी। उन्होंने दावा किया कि घटना वाली रात गौसिया और सलीम ने मिलकर इसराइल को तेजाब पिला दिया। परिवार ने मांगा इंसाफ
घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मृतक के भाई ने बारादरी थाने में दी गई शिकायत में कहा है कि सलीम उन्हें कानूनी कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है। पुलिस ने शुरू की जांच
परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में फर्जी पुलिस चौकी बनाकर युवकों को हनीट्रैप में फंसाने और उनसे रकम ऐंठने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान पुट्ठा निवासी विशाल के रूप में हुई है। वह गिरोह की बनाई फर्जी पुलिस चौकी में सिपाही की भूमिका निभाता था। पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर रही है। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब एक अगस्त को नीरज पाल पुत्र शक्तिवीर सिंह ब्रह्मपुरी थाने पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने उसे हनीट्रैप में फंसाकर 10 हजार रुपये ठग लिए हैं। आरोप लगाया कि उसे अगवा करके रखा गया और उसके साथ मारपीट भी की गई। इसके बाद डराकर एक बार कोड के जरिये 10 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत मिलने के बाद ब्रह्मपुरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शिवपुरम में एक स्थान पर छापा मारा। छापे के दौरान पुलिस ने मौके से दो युवकों को हिरासत में लिया। उनकी पहचान रिठानी निवासी राहुल पाल पुत्र राकेश पाल और पुट्ठा निवासी आकाश पुत्र नरेश कुमार के रूप में हुई। दोनों से पूछताछ की गई तो फर्जी पुलिस चौकी चलाने वाले गिरोह का हैरान करने वाला खेल सामने आया। युवती बनकर युवकों से करते थे अश्लील बातें
पुलिस के अनुसार, आरोपी युवती की आवाज में युवकों से फोन पर बातचीत करते थे। बातचीत को धीरे-धीरे अश्लील बनाया जाता और फिर संबंधित युवक को अपने जाल में फंसा लिया जाता था। इसके बाद आरोपियों की ओर से युवक के खिलाफ एक फर्जी शिकायती पत्र तैयार किया जाता। युवक को यह कहकर धमकाया जाता कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया जाएगा। कार्यालय कम चौकी में करते थे मारपीट
धमकी से घबराने वाले युवकों को आरोपी अपने कार्यालय में बुलाते थे। यहां पहुंचने के बाद गिरोह का अगला खेल शुरू होता था। आरोपियों ने जिस मकान में यह पूरा अड्डा बनाया हुआ था, उसके एक हिस्से को बाकायदा पुलिस चौकी का रूप दे रखा था। यहां आरोपी खुद को सीओ, इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाही बताते थे। इसके बाद युवक को पुलिसिया अंदाज में धमकाया और प्रताड़ित किया जाता था। डर का माहौल बनाकर उससे रकम वसूल ली जाती थी। राहुल के मकान में बना रखी थी फर्जी चौकी
पुलिस जांच में सामने आया कि जिस मकान में फर्जी पुलिस चौकी बनाई गई थी, वह राहुल पाल का है। करीब डेढ़ वर्ष पहले राहुल ने जमीन लेकर यहां निर्माण कार्य शुरू कराया था। करीब चार माह पहले मकान बनकर तैयार हुआ। इसके बाद मकान के एक हिस्से में फर्जी पुलिस चौकी तैयार कर ली गई। अंदर दिखाई देता था चौकी जैसा नजारा
बाहर से देखने पर यह मकान सामान्य नजर आता था। आरोपियों ने बाहर पुलिस चौकी का कोई बोर्ड भी नहीं लगाया था। हालांकि अंदर पहुंचने पर पूरा नजारा पुलिस चौकी जैसा दिखाई देता था। पुलिस को तलाशी के दौरान वहां से पुलिस की बैंत, वॉकी-टॉकी सेट, बीट बुक और मोहर बरामद हुई। इसके अलावा एक फाइल भी मिली, जिसमें कई शिकायती पत्र रखे हुए थे। इन सामानों के मिलने से पुलिस को गिरोह के सुनियोजित तरीके से फर्जी पुलिस चौकी चलाने के साक्ष्य मिले। नीरज को भी इसी जाल में फंसाया
पुलिस के मुताबिक, नीरज पाल को भी आरोपियों ने इसी तरीके से अपने जाल में फंसाया था। पहले उसे युवती की आवाज में बातचीत कर हनीट्रैप में फंसाया गया। इसके बाद उसके खिलाफ शिकायत और मुकदमे का डर दिखाया गया। आरोपियों ने उसे अपनी फर्जी चौकी में बुलाया और वहां पुलिसकर्मी बनकर धमकाया। मारपीट और प्रताड़ना के बाद उससे 10 हजार रुपये एक बार कोड के जरिये ट्रांसफर करा लिए गए। राहुल-आकाश ने खोला विशाल का नाम
राहुल और आकाश से पूछताछ के बाद पुलिस को गिरोह से जुड़े कुछ और लोगों के नाम पता चले। इनमें पुट्ठा निवासी विशाल का नाम भी सामने आया। पुलिस ने शनिवार रात विशाल को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में उसकी क्या भूमिका थी और अब तक कितने लोगों को इसी तरह हनीट्रैप में फंसाकर उनसे रकम वसूली गई। गिरोह के नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि फर्जी चौकी में मिले शिकायती पत्र किन लोगों से संबंधित हैं और क्या इन युवकों से भी इसी तरीके से वसूली की गई थी। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क और बैंक खातों की भी जांच कर सकती है। फर्जी पुलिस चौकी में पुलिस से जुड़े सामान और दस्तावेज मिलने के बाद यह भी जांच का विषय है कि आरोपियों ने ये सामान कहां से हासिल किए। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी तलाश रही है।
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भारतीय गिटारिस्ट, संगीतकार और कंपोजर साक्षम अग्रवाल, जो अपने म्यूजिकल प्रोजेक्ट टीओटीआई (TOTI) के नाम से जाने जाते हैं, ने दुबई में अरबी संगीतकार हसन ताकी इब्राहिम के साथ एक खास अंतर-सांस्कृतिक संगीत सहयोग किया है। इस लाइव सेशन में प्राचीन अरबी वाद्य यंत्र क़ानून और आधुनिक इलेक्ट्रिक गिटार को एक साथ प्रस्तुत किया गया। इस सहयोग की खासियत सिर्फ दो अलग-अलग वाद्यों का साथ आना नहीं, बल्कि दो अलग संगीत परंपराओं के कलाकारों के बीच स्वाभाविक और तात्कालिक संगीत संवाद है। क़ानून मध्य-पूर्व की प्राचीन संगीत परंपरा से जुड़ा तार वाद्य है, जो अपनी सूक्ष्म टोनल बारीकियों, तेज मेलोडिक पैटर्न और माइक्रोटोनल अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है। इसके मुकाबले साक्षम का आधुनिक इलेक्ट्रिक गिटार समकालीन टोन, टेक्सचर और इम्प्रोवाइजेशन की भाषा पेश करता है। प्रस्तुति की सबसे बड़ी बात इसकी स्पॉन्टेनिटी रही। कई संगीतात्मक क्षण पहले से तय नहीं थे, बल्कि दोनों कलाकारों के एक-दूसरे को सुनने, प्रतिक्रिया देने और उसी पल संगीत को आगे बढ़ाने से विकसित हुए। साक्षम ने गिटार को महज क़ानून के साथ बजने वाले दूसरे वाद्य की तरह इस्तेमाल करने के बजाय क़ानून की धुन, लय और टोनल चरित्र को सुनते हुए अपनी गिटार भाषा से जवाब दिया। दोनों वाद्यों के बीच यह संवाद कभी मेलोडिक, कभी लयात्मक और कभी पूरी तरह इम्प्रोवाइज्ड रूप लेता रहा। साक्षम अग्रवाल ने इस अनुभव के बारे में कहा कि मेरे लिए इस सहयोग का उद्देश्य केवल गिटार और क़ानून को एक साथ बजाना नहीं था। दोनों वाद्य यंत्रों की अपनी अलग संगीत भाषा है। क़ानून की मेलोडिक बारीकियों और अरबी संगीत की टोनल संवेदनशीलता को आधुनिक गिटार की हार्मनी और इम्प्रोवाइजेशन के साथ जोड़ना मेरे लिए एक बेहद रोचक संगीत अनुभव था। साक्षम का संगीत आधुनिक गिटार, जैज इम्प्रोवाइजेशन, रॉक-मेटल और सिनेमैटिक कंपोजिशन के अनुभवों का मिश्रण है। वर्तमान में वे टीओटीआई प्रोजेक्ट के साथ-साथ कंपोजिशन, फिल्म स्कोरिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों पर काम कर रहे हैं। उनका मकसद आधुनिक संगीत और दुनिया की अलग-अलग संगीत परंपराओं के बीच नए रचनात्मक संवाद स्थापित करना है।
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यमुना तट स्थित कैलाश महादेव मंदिर परिसर में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ का आयोजन किया गया। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महासभा की ओर से आयोजित महायज्ञ में 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने आहुति दी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने सामाजिक समानता, भाईचारे और सद्भाव का संकल्प लिया। महायज्ञ की विधियां गायत्री परिवार से जुड़े सुरेश चंद्र सक्सेना के मार्गदर्शन में संपन्न हुईं। कार्यक्रम में ग्राम बिचपुरी और सेमरी के 25 घुमंतु परिवारों ने भी भाग लिया। महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम और सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि संत रविदास के विचार समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और समानता पहुंचाने की प्रेरणा देते हैं। संत रविदास के जीवन-दर्शन पर हुई संगोष्ठी
महायज्ञ के बाद यमुना तट स्थित सभागार में संत रविदास के व्यक्तित्व, कृतित्व और विचारों पर संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने संत रविदास के आध्यात्मिक जीवन और सामाजिक संदेश पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन से कर्म, चरित्र, भक्ति और विचारों के महत्व का संदेश दिया।
विभाग संचालक राजन सिंह ने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता है। कैलाश महादेव मंदिर के महंत निर्मल गिरी ने उनकी भक्ति और मन की पवित्रता के संदेश पर प्रकाश डाला। विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री राजेश ने संत रविदास के विचारों को सामाजिक एकता के लिए प्रासंगिक बताया। वाल्मीकि महापंचायत के तखत चौधरी मान सिंह ने कहा कि संत रविदास ने वंचित और उपेक्षित वर्गों में आत्मसम्मान और समानता का भाव जगाया। भंते अशोक रत्न ने मानवता, करुणा और भाईचारे के संदेश पर विचार रखे। योगी जहाज नाथ ने मन की निर्मलता को संत रविदास की शिक्षाओं का प्रमुख आधार बताया। प्रमोद सिंह ने युवाओं से संत रविदास के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने की अपील की। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इनकी रही मौजूदगी
संगोष्ठी का संचालन प्रचार प्रमुख विजय सामा ने किया। इस दौरान संघटक मनमोहन निरंकारी, सह सचिव डॉ. निष्ठा शर्मा, अभिषेक कोटिया, राकेश नेमीचंद, अशोक चौबे और संजीव चौबे सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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गाजियाबाद में कांवड़ यात्रा के लिए अलग मार्ग निर्धारित होने के बावजूद शनिवार को शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। सुबह से ही विभिन्न हिस्सों में जाम की स्थिति बनी रही, जो दोपहर 2 बजे के बाद और बिगड़ गई। रात 10 बजे तक कई मुख्य सड़कों पर वाहन रेंगते हुए देखे गए। राजनगर एक्सटेंशन से दिल्ली की ओर जाने वाला एलिवेटेड रोड, लालकुआं और जीटी रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। विभिन्न इलाकों से सामने आए वीडियो में भी वाहनों की लंबी कतारें स्पष्ट दिखाई दीं। जाम के कारण लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लगा। जाम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार दोपहर करीब 4 बजे एडीएम सिटी का वाहन भी इसमें फंस गया। इसके अलावा, मोदीनगर क्षेत्र में जाम के कारण एक एंबुलेंस के फंसने की भी जानकारी मिली। नौकरी और कार्यालय से लौट रहे लोगों के साथ-साथ कांवड़ियों को भी यातायात बाधित होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर गाजियाबाद में यातायात व्यवस्था संभालने के लिए एक हजार से अधिक यातायात कर्मियों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद, शहर के कई हिस्सों में दोपहर से देर रात तक यातायात का दबाव कम नहीं हो सका। कांवड़ मार्गों पर यातायात को अलग रखने की व्यवस्था के बावजूद अन्य प्रमुख मार्गों पर बढ़े दबाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
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पीएम मोदी ने शनिवार रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बातचीत की। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। मोदी ने लिखा, “अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया। हमने प्रमुख क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।” उन्होंने वेंस को बेटे के जन्म पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। दरअसल, 19 जुलाई को जेडी वेंस चौथी बार पिता बने थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति पिछले साल भारत दौरे पर आए थे अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 3 से 7 मार्च 2025 तक भारत में थे। उनके साथ-साथ उनकी पत्नी उषा और तीनों बच्चे- इवान, विवेक और मिराबेल भी भारत आए थे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें दिल्ली में रिसीव किया था। एयरपोर्ट पर ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। उन्होंने PM मोदी से भी मुलाकात की थी। उपराष्ट्रपति बनने के बाद यह जेडी वेंस की पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी। ट्रम्प भी 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प साल 2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं। 27 जून को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ये बयान दिया। ये ट्रम्प की राष्ट्रपति रहते हुए दूसरी भारत यात्रा हो सकती है। इससे पहले ट्रम्प साल 2020 में पहली बार भारत यात्रा पर आए थे। वे अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रम्प’ कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश से थे जेडी वेंस की पत्नी ऊषा का जन्म और स्कूली शिक्षा सैन डिएगो में हुआ है। उनके माता-पिता 1980 के दौरान आंध्र से अमेरिका आकर बसे गए थे। अमेरिका में रहने के बावजूद उनके माता-पिता ने वहां की मॉडर्न संस्कृति से प्रभावित हुए बिना उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के अनुसार शिक्षा और संस्कार दिए। बाद में वेंस भी इन संस्कारों से प्रभावित हुए। ऊषा की मां एक बायोलॉजिस्ट हैं और पिता इंजीनियर। ऊषा कहती हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए ही पढ़ाई की है। येल से बैचलर की डिग्री हासिल करने के बाद ऊषा ने गेट्स कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप की मदद से कैम्ब्रिज से मास्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री हासिल की। ऊषा ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिए क्लर्क के रूप में काम किया। कल ही भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिका में पास हुआ अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार रात 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। हालांकि, अभी ये कानून नहीं बना है। अभी इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। अगर वहां भी बिल पास हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…
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- Tamil Nadu Delimitation Meeting | DMK AIADMK Boycott; 21 MPs Oppose Move
30 मिनट पहले
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को राज्य के सांसदों की बैठक बुलाई। इसमें केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन पर चर्चा हुई, लेकिन DMK और AIADMK शामिल नहीं हुए।
बैठक में कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML के करीब 21 सांसद शामिल हुए। ANI के मुताबिक, सभी ने सहमति जताई कि भविष्य में परिसीमन की किसी भी व्यवस्था के तहत तमिलनाडु का संसदीय प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने भी आज परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के समर्थन की घोषणा की।

सांसदों ने 543 सीटों वाला सदन बनाए रखने की मांग की
बैठक के बाद कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस मुद्दे को पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों के सभी सांसदों की बैठक बुलाई थी। हममें से करीब 21 सांसद बैठक में शामिल हुए। इस बात पर पूरी सहमति थी कि तमिलनाडु के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। संसद में हमारा प्रतिनिधित्व कम नहीं किया जा सकता।”
महिला आरक्षण बिल से जुड़ा पूरा मामला, 4 पॉइंट्स में समझें…
महिला आरक्षण से जुड़ा नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद से पास हुआ था। इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें (33%) आरक्षित करना है।
इससे जुड़े संशोधन बिल पर चर्चा से पहले 16 अप्रैल को इसे लागू किया गया था। कानून लागू होने के बावजूद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण तुरंत नहीं मिलेगा।
2023 के कानून के मुताबिक, यह 2027 की जनगणना और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जा सकेगा। इसके लिए सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 बिल पास कराना चाहती है।
परिसीमन संशोधन बिल के तहत सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है। जिसके बाद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा।

अकाली दल ने सरकार को समर्थन दिया

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को महिला आरक्षण और परिसीमन पर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बदले रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सभी दलों को निष्पक्ष और समान परिसीमन पर साथ आना चाहिए।
SAD ने मांग की है कि संसद महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पास करे। दोनों विधेयकों को बिना और देरी लागू करने के लिए राज्यों की सीटों में एक समान 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए।
अप्रैल में भी विशेष सत्र बुलाया, बिल पास नहीं हो सका
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक भी संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। इस दौरान परिसीमन संशोधन संविधान बिल, संविधान का 131वां संशोधन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल पर चर्चा की गई थी।
18 अप्रैल को संविधान का 131वां संशोधन बिल पर वोटिंग हुई थी लेकिन सरकार बिल लोकसभा में पास नहीं करा पाई थी। इसके बाद सरकार ने बाकी दो बिल भी पेश नहीं किए थे। पूरी खबर पढ़ें…
