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हरदोई में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हरदोई के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दोपहर बाद 3:45 बजे सांसद जयप्रकाश रावत से मुलाकात की। महासंघ ने टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा टीईटी को न्यूनतम योग्यता घोषित करने और हाल ही में 29 मई 2024 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में अपने भविष्य को लेकर चिंता है। महासंघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों की नियुक्तियाँ टीईटी नियम लागू होने से पहले, तत्कालीन नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर वैध रूप से की गई थीं, उन्हें बाद में लागू किए गए नए पात्रता मानकों के आधार पर प्रभावित करना अनुचित है। यह न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के खिलाफ है। सभी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील संगठन के जिला संयोजक सचिन मिश्रा ने कहा कि ये शिक्षक पिछले कई वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ शिक्षा जगत और राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाकर इन सभी शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि उनके अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सांसद जयप्रकाश रावत ने शिक्षकों की इस गंभीर समस्या को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे आगामी मानसून सत्र में संसद के पटल पर इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाएंगे। इस अवसर पर अनिल दीक्षित, प्रदीप गुप्ता उर्फ निराला, अवनीश तिवारी, अमित शुक्ला, राम किंकर बाजपेई, अरुण बाजपेई, सौरभ सिंह, विनीत अग्निहोत्री और खुशबु श्रीवास्तव सहित कई शिक्षक साथी उपस्थित रहे।



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