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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में बुधवार दोपहर 3 बजे विमेन एसोसिएशन की ओर से पारंपरिक लोक कला प्रदर्शनी ‘कलासंगम’ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों की लोक कला शैलियों को कैनवास पर उकेरकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। इसमें आईआईटी कैंपस की महिलाओं, उनके परिवारों और मित्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन में मधुबनी, पिचवई, वर्ली, लिप्पन, ऐपण, कालीघाट, मंडला, थांगका और पट्टचित्र जैसी पारंपरिक लोक कलाओं का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों की रचनात्मकता को मंच देना और भारतीय लोक कला परंपराओं को बढ़ावा देना था। कैंपस की महिलाओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शनी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें आईआईटी कानपुर विमेन एसोसिएशन की सदस्यों, उनके परिवारों और मित्रों ने टीम बनाकर हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक सोच और कलात्मक कौशल का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न लोक कला शैलियों को कैनवास पर जीवंत किया। ‘कलासंगम’ में बिहार की मधुबनी, राजस्थान की पिचवई, महाराष्ट्र की वर्ली, गुजरात की लिप्पन कला के अलावा उत्तराखंड की ऐपण, पश्चिम बंगाल की कालीघाट, मंडला, थांगका और ओडिशा की पट्टचित्र कला का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। विशेष रूप से मिट्टी और दर्पण से तैयार की जाने वाली लिप्पन कला ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। टीम वर्क और संस्कृति का मिला संदेश कार्यक्रम का समन्वयन राशि पंत और पूर्वा गोरे ने किया। विमेन एसोसिएशन की सचिव अमृता के. भूषण ने कहा कि ऐसे आयोजन प्रतिभागियों में रचनात्मकता और उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ आपसी सहयोग और एकजुटता की भावना को भी मजबूत करते हैं। सांस्कृतिक विरासत को मिला मंच उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर में देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोग रहते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से सभी को एक मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को साझा करने का अवसर मिलता है।



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