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यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस अब पासपोर्ट के पैटर्न पर बनेंगे। यानी पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो जाएगा। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग के बाद अधिकारियों के साथ इंटरव्यू और फिर टेस्ट होगा।

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परिवहन विभाग जल्द नए नियम जारी कर देगा। सरकार चाहती है कि लाइसेंस सिर्फ उन्हीं को मिले, जिन्हें गाड़ी ठीक से ड्राइव करना हो। साथ ही, वह ट्रैफिक नियमों को जानता हो।

आरटीओ में भी डिजिटल टोकन व्यवस्था होगी लागू

पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह आरटीओ में भी डिजिटल टोकन व्यवस्था लागू होगी। आवेदन करने वालों को समय के हिसाब से टोकन मिलेगा। स्क्रीन पर नंबर आने के बाद ही बायोमेट्रिक, फोटो या दूसरे काउंटर पर प्रवेश मिलेगा। ऐसा होने के बाद कार्यालयों में भीड़ कम होगी। दलालों का रोल भी खत्म हो सकेगा।

ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले पापुलिस वेरिफिकेशन होगा। अभी तक ऐसा सिर्फ पासपोर्ट इश्यू करने से पहले किया जाता है। इसमें आवेदक के एड्रेस और क्रिमिनल रिकॉर्ड की जांच हो सकती है। फिलहाल परिवहन विभाग यह देख रहा है कि मौजूदा कानून के तहत इसे कैसे लागू किया जाए।

परिवहन विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, पुलिस वेरिफिकेशन सबके लिए अनिवार्य नहीं होगा। यह दो स्थितियों में होगा-

  • कमर्शियल लाइसेंस के लिए- बस, ट्रक, ऑटो या टैक्सी चलाने वालों के लिए क्रिमिनल रिकॉर्ड और कैरेक्टर सर्टिफिकेट का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।
  • संदिग्ध मामलों में- बाइक या कार लाइसेंस के लिए सिर्फ उन मामलों में पुलिस वेरिफिकेशन होगा, जहां आवेदक का आधार डेटा मैच नहीं करेगा। जिसके खिलाफ पहले से कोई गंभीर हिट-एंड-रन या हिट लिस्टेड केस दर्ज होगा।

कैमरे, सेंसर और कंप्यूटर परखेंगे आपकी ड्राइविंग

आरटीओ में अभी तक मैन्युअल टेस्ट होता था। अब इसकी जगह मान्यता प्राप्त हाइटेक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों पर टेस्ट होंगे। यहां सेंसर, कैमरे और कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम आपकी ड्राइविंग जांचेंगे। इससे सिफारिश या रिश्वत के जरिए लाइसेंस बनवाना मुश्किल हो जाएगा।

यूपी के सभी बड़े आरटीओ जैसे- लखनऊ, कानपुर, नोएडा और गाजियाबाद को ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक से जोड़ा जा रहा है। यहां 3 तरह के ट्रैक बने होते हैं। पहला- रिवर्स-एस यानी इंग्लिश के अक्षर एस की डिजाइन में गाड़ी को उल्टा चलाना। दूसरा- एट-शेप यानी गणित के आठ की डिजाइन में गाड़ी को चलाना। तीसरा- अप-हिल यानी चढ़ाई पर गाड़ी रोकना और बढ़ाना।

फेल होने के चांस 40% तक, 3 बार फेल तो आवेदन रद्द

अगर गाड़ी चलाते समय आपकी कार का पहिया ट्रैक की पीली लाइन को छू जाता है। या सेंसर वाले पोल से टच होता है। तो कंप्यूटर बिना किसी इंसानी दखल के तुरंत ‘FAIL’ मार्क कर देता है। इस टेस्ट में फेल होने की दर 40% से ज्यादा है।

ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट में नियम काफी सख्त हैं। अगर आप पहली बार फेल होते हैं, तो अगले दिन टेस्ट नहीं दे सकेंगे। दोबारा टेस्ट के लिए कम से कम 7 दिन बाद नया स्लॉट लेना होगा। अगर 3 बार लगातार फेल हो गए, तो आवेदन रद्द हो जाएगा। इसके बाद 6 महीने तक नया आवेदन नहीं कर सकेंगे और पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होगी।

टेस्ट से पहले LIVE फोटो और बायोमेट्रिक होगा

आरटीओ पहुंचने पर आवेदक की लाइव फोटो और बायोमेट्रिक लिया जाएगा, जिसका मिलान आधार से किया जाएगा। इसके बाद ड्राइविंग टेस्ट भी उसी व्यक्ति को देना होगा। टेस्ट से पहले भी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन होगा, इसलिए किसी दूसरे से गाड़ी चलवाकर लाइसेंस बनवाना संभव नहीं होगा। पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड तुरंत सरकारी सारथी पोर्टल पर अपलोड होगा। इससे दलालों, सिफारिश और फर्जी लाइसेंस पर काफी हद तक रोक लगेगी।

28 दिन की ट्रेनिंग करने वालों को मिलेगी छूट

सरकार ने एक राहत भी दी है। अगर कोई व्यक्ति सरकार से मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में 28 दिन की ट्रेनिंग पूरी कर लेता है और उसे फॉर्म-5 जारी हो जाता है, तो उसे अलग से आरटीओ या ऑटोमैटिक ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देने की जरूरत नहीं होगी। उसे सीधे परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। ये छूट केवल उन्हीं सेंटरों पर मिलेगी जो ‘परिवहन विभाग से मान्यता प्राप्त सर्टिफाइड ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल (DTC)’ होंगे।

सड़क हादसे रोकने के लिए हो रहा बदलाव

परिवहन विभाग के मुताबिक, यूपी में इस समय करीब 2.99 करोड़ एक्टिव ड्राइविंग लाइसेंस हैं। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा 13.66 लाख लाइसेंस अकेले लखनऊ RTO से जारी किए गए हैं। सरकारी जांच और रोड सेफ्टी ऑडिट में सामने आया है कि सड़क पर चलने वाले कई लोग नियमों से अनजान हैं। इसे रोकने के लिए लाइसेंस बनाने के नियमों में बदलाव हो रहा है।

इन जिलों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे

जिला 2024 2025
प्रयागराज 1,246 1,477
आगरा 1,223 1,456
कानपुर नगर 1,448 1,458
गोरखपुर 1,276 1,336
अलीगढ़ 959 1,241
लखनऊ 1,630 1,714
गाजियाबाद 996 1,097
वाराणसी 538 696
अयोध्या 618 687
झांसी 615 635
सहारनपुर 500 560
बरेली 1,196 951 ⬇️

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