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पहलगाम/बालटाल1 दिन पहले

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दक्षिण कश्मीर में बनी अमरनाथ गुफा, तस्वीर 4 जुलाई की है। यहीं भगवान शिव का हिमलिंग बनता है। - Dainik Bhaskar

दक्षिण कश्मीर में बनी अमरनाथ गुफा, तस्वीर 4 जुलाई की है। यहीं भगवान शिव का हिमलिंग बनता है।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अमरनाथ पहुंच रहे यात्रियों से कहा है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें। प्रशासन के मुताबिक, 9 जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।

ऐसे में अगर कोई यात्री बिना रजिस्ट्रेशन बालटाल या पहलगाम रूट से आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे चेक पॉइंट्स पर रोक दिया जाएगा। उसे 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि रविवार से केवल रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी। बिना रजिस्ट्रेशन वाले यात्रियों को चेक पोस्ट पर रोक दिया जाएगा। उन्हें 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने मिलेगा।

जम्मू डिविजनल कमिश्नर रमेश कुमार ने कहा कि 3 दिन में 13 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड यात्री बालटाल-पहलगाम रूट से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए बेस कैंप से रवाना किए जा चुके हैं।

3 जुलाई से शुरू हुई यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी। 57 दिनों के दौरान 14km लंबे बालटाल रूट और 48km लंबे पहलगाम रूट से यात्री गुफा के लिए जाएंगे।

यात्रा रूट की 5 तस्वीरें…

पहलगाम रूट पर यात्रा के दौरान एक पुलिस अधिकारी तीर्थयात्री से बातचीत करते हुए। सुरक्षा में तैनात जवान सभी यात्रियों की मदद कर रहे हैं।

पहलगाम रूट पर यात्रा के दौरान एक पुलिस अधिकारी तीर्थयात्री से बातचीत करते हुए। सुरक्षा में तैनात जवान सभी यात्रियों की मदद कर रहे हैं।

यात्रा के दौरान माउंटेन रेस्क्यू टीम (MRT) का एक अधिकारी एक तीर्थयात्री को मेडिकल सहायता देता हुआ। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

यात्रा के दौरान माउंटेन रेस्क्यू टीम (MRT) का एक अधिकारी एक तीर्थयात्री को मेडिकल सहायता देता हुआ। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

शनिवार को अनंतनाग में अमरनाथ गुफा मंदिर में पूजा करने के बाद लौटते समय एक भक्त अपने कंधे पर भगवान शिव की मूर्ति लेकर जाता दिखाई दिया।

शनिवार को अनंतनाग में अमरनाथ गुफा मंदिर में पूजा करने के बाद लौटते समय एक भक्त अपने कंधे पर भगवान शिव की मूर्ति लेकर जाता दिखाई दिया।

पहलगाम रूट पर पिट्‌ठू की मदद से गुफा की तरफ बढ़ते लोग। यहां चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग, पौषपत्री और महागणेश टॉप, पंचतरणी भी पड़ता है।

पहलगाम रूट पर पिट्‌ठू की मदद से गुफा की तरफ बढ़ते लोग। यहां चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग, पौषपत्री और महागणेश टॉप, पंचतरणी भी पड़ता है।

बालटाल रूट से 'अमरनाथ गुफा' की तरफ बढ़ते यात्री। इस रूट से पैदल यात्री एक दिन में दर्शन करके लौट सकते हैं।

बालटाल रूट से ‘अमरनाथ गुफा’ की तरफ बढ़ते यात्री। इस रूट से पैदल यात्री एक दिन में दर्शन करके लौट सकते हैं।

यात्रा के 3 दिन में 4 जत्थे रवाना

लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने 2 जुलाई को 4,822 यात्रियों का पहला जत्था रवाना किया था। दूसरे जत्थे में 3,865 यात्री शामिल थे, जबकि शनिवार को बेस कैंप से रवाना किए गए तीसरे जत्थे में 4,812 यात्री रवाना हुए। रविवार को चौथे जत्थे में 6721 श्रद्धालु शामिल हुए।

कुमार ने कहा कि प्रशासन ने पहले से रजिस्टर्ड यात्रियों के लिए RFID वितरण केंद्र बनाए हैं। यह मौके पर (तत्काल) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी दे रहा है। पहले से रजिस्टर्ड यात्रियों की रवानगी पहले करवाई जाती है। अगर डेली कोटा बचता है, तब तत्काल रजिस्ट्रेशन के लिए दिया जाता है।

हालांकि, गुफा मंदिर के रास्ते में नाजुक भौगोलिक स्थिति, ग्लेशियर वाले इलाके और मौसम के कारण सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हर दिन जाने वाले यात्रियों की संख्या तय की जाती है।

भारी भीड़ को संभालने के लिए, प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे लोगों को लगभग 12,000 टोकन बांटे हैं। टोकन सिस्टम से तीर्थयात्री अपनी तय रजिस्ट्रेशन तारीख पर वापस आ सकते हैं।

40 दिन में घटकर 4 फीट के हुए बाबा बर्फानी

अमरनाथ में बनने वाले पवित्र शिवलिंग का आकार 4 फीट रह गया है। 23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था।

29 जून को प्रथम पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 3 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 4 फीट का दिखाई दे रहा है। इसकी चौड़ाई भी घट गई है।

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2029 से अमरनाथ के लिए केबल कार चलाने की तैयारी: अप्रैल 2027 से काम शुरू होगा; 5-8 घंटे का सफर 30 मिनट में पूरा होगा

बाबा बर्फानी की यह तस्वीर 2026 की है, अभी हिमलिंग करीब 5 फीट ऊंचा है।

अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु 2029 से बालटाल रूट पर केबल कार से सफर कर सकेंगे। केंद्र सरकार अगले साल अप्रैल से 11.6 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने की तैयारी में है। परियोजना पूरी होने के बाद बालटाल से संगम टॉप तक पहुंचने में 5 से 8 घंटे की जगह 25 से 30 मिनट लगेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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