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राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन पूर्व IFS अफसर हैं। भाजपा से लेकर संघ के अंदर उनकी छवि बेहद भरोसेमंद व्यक्ति की है। असल में, वह ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के एक ताकतवर ट्रस्टी हैं। 2024 में जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा

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हाल ही में राम मंदिर में सामने आए करोड़ों रुपए के चढ़ावा चोरी का भंडाफोड़ करने वाले मुख्य व्यक्ति कृष्ण मोहन ही हैं। उन्होंने ही इस मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद SIT जांच बैठी और 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई।

उन्हें मंदिर प्रशासन और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक ‘मैनेजमेंट एक्सपर्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है। वह मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल करने की वकालत कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ काम करना पसंद है। यही वजह है कि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने के लिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल करने को लेकर अहम फैक्ट ये भी है कि राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य दलित सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद, ट्रस्ट में दलित समाज का प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए सितंबर, 2025 में कृष्ण मोहन को शामिल किया गया था।

कृष्ण मोहन का RSS (संघ) से गहरा नाता कृष्ण मोहन मूल रूप से यूपी के हरदोई जिले के रहने वाले हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक (क्षेत्र प्रभारी) हैं।

संघ के नागपुर मुख्यालय से लेकर भाजपा और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच उनकी छवि बेहद ईमानदार और भरोसेमंद व्यक्ति की है। इसी मजबूत पकड़ के कारण वे बहुत कम समय में संघ के इतने बड़े पद तक पहुंचे।

महाराष्ट्र कैडर के अधिकारी, बेदाग छवि रही

कृष्ण मोहन 1977 बैच के पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हैं और महाराष्ट्र कैडर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। साल 2012 में रिटायर होने से लेकर अब तक के उनके लंबे प्रशासनिक और सामाजिक करियर में उन पर कभी भी भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है।

उनकी इसी ‘क्लीन इमेज’ और ईमानदारी के कारण ही संघ और ट्रस्ट ने उन्हें मंदिर के वित्तीय मामलों पर नजर रखने और गड़बड़ियों को उजागर करने की खुली छूट दी। लखनऊ यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी में एमएससी की। फिर दशकों तक IFS अफसर के तौर पर काम करने के कारण उनके पास मैनेजमेंट स्किल्स हैं।

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