![]()
फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर सावन में कांवड़ भरने आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। गंगा में हादसों को रोकने के लिए दोनों किनारों पर बांस की बैरिकेडिंग लगाई गई है। इसके अलावा घाट पर सुरक्षा, प्रकाश, स्वास्थ्य और साफ-सफाई समेत सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है। सावन महीने में गंगा जल लेने के लिए पांचाल घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। शाहजहांपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, मैनपुरी, इटावा, बदायूं समेत कई जिलों से कांवड़िए दिन-रात घाट पर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहा है, ताकि कांवड़ियों को किसी तरह की परेशानी न हो। गंगा में निगरानी कर रही फ्लड यूनिट और पीएसी गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए गंगा के दोनों किनारों पर बांस की बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए फ्लड यूनिट और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। फ्लड यूनिट की टीम मोटरबोट के जरिए गंगा में लगातार निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। घाट और हाईवे पर बढ़ाई गई रोशनी कांवड़ियों की सुविधा के लिए घाट क्षेत्र में लाइटिंग व्यवस्था को बेहतर किया गया है। नेशनल हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटों को भी ठीक कराया गया है। शनिवार रात पुल और उसके आसपास की लाइटें चालू रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को रात के समय आवागमन में परेशानी न हो। डॉक्टर, एंबुलेंस और दमकल टीमें भी तैनात पांचाल घाट पर पुल के दोनों ओर डॉक्टरों की टीमें तैनात की गई हैं। इसके साथ ही एंबुलेंस और दमकल की टीमें भी मौजूद हैं। रविवार सुबह घाट पर साफ-सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त कराया गया। पक्के घाट पर प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि पुल के दोनों तरफ सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। दीवारों पर लिखे गए गोताखोरों के नंबर घाट पर बनी दीवारों पर गोताखोरों के संपर्क नंबर भी लिखवाए गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से गोताखोर पहले से तैनात हैं, लेकिन आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता मिल सके, इसके लिए नंबर सार्वजनिक किए गए हैं। डीएम ने निरीक्षण कर दिए थे निर्देश शनिवार शाम जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने पांचाल घाट पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी व्यवस्था में कमी नहीं रहनी चाहिए और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
Source link