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हमीरपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र में वारंट तामील करने के दौरान गलत युवक को हिरासत में लेकर कथित मारपीट किए जाने के मामले में पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी दरोगा सुरेंद्र पाल को लाइन हाजिर कर दिया है। उधर, इसी मामले को लेकर मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर पुलिस की कार्यशैली और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा गया। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के मेरापुर का है। शनिवार शाम करीब सात बजे पुलिस वारंट तामील करने पहुंची और शिवराज नाम के एक युवक को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई। आरोप है कि वहां उसकी पिटाई की गई। बाद में परिजनों के हंगामे के दौरान पता चला कि जिस शिवराज के नाम वारंट जारी था, वह कोई दूसरा व्यक्ति था और पुलिस गलती से दूसरे युवक को उठा लाई थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से शिवराज गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, पुलिस का कहना था कि युवक ने थाने के अंदर स्वयं को चोट पहुंचाई थी। मामला बढ़ने पर घायल शिवराज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद भी सोमवार रात पीड़ित शिवराज से मिलने जिला अस्पताल पहुंचीं और पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात कर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मामले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक ने आरोपी दरोगा सुरेंद्र पाल को लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोविंद अहिरवार ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में पुलिस पर दबाव बनाकर इस प्रकार की घटनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की भावना के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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