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खतौली क्षेत्र के फुलत गांव स्थित दारुल उलूम रहीमिया मदरसे में कथित धर्मांतरण के आरोपों के मामले में आखिरकार पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना रतनपुरी में दर्ज एफआईआर में मदरसा संचालक मौलाना हफीजुर्रहमान अंसारी और उसके बेटे मौलाना जुबेर अंसारी को नामजद किया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 351(2), 3 और 5(2) के तहत दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले को उठाने वाले योग साधना आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने सोमवार शाम करीब 5 बजे मुज़फ्फ़रनगर पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा का आभार व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल एफआईआर दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि दोनों आरोपियों द्वारा कथित रूप से अर्जित 500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की भी गहन जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि यदि केवल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई रोक दी गई तो आरोपी भविष्य में फिर इसी प्रकार की गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के पास पहले साधारण जीवनयापन के अलावा कोई बड़ा साधन नहीं था, उनके पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे पहुंची, इसकी वित्तीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने दोनों आरोपियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे कथित धर्मांतरण नेटवर्क, फंडिंग और अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकेगा। स्वामी यशवीर महाराज ने राज्य सरकार से दारुल उलूम रहीमिया मदरसे को स्थायी रूप से सील करने की मांग भी दोहराई। उनका आरोप है कि मदरसे में सरकारी भूमि पर भी कब्जा किया गया है, जिसे प्रशासन तत्काल मुक्त कराए। उन्होंने कहा कि अब इस मदरसे को किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार यह मुकदमा गांव फुलत निवासी मोहम्मद यूनुस की तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मदरसा संचालकों ने वर्षों पहले हिंदू युवक का बहला-फुसलाकर और धमकाकर धर्मांतरण कराया तथा अन्य लोगों के साथ भी इसी प्रकार की गतिविधियां की गईं। शिकायतकर्ता ने विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
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