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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मंगलवार शाम छह बजे शहर में सॉस बनाने वाली तीन इकाइयों पर छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान बिना लाइसेंस सॉस निर्माण, अत्यधिक गंदगी में उत्पादन और खाद्य मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आए। टीम ने विभिन्न प्रकार के सॉस के नमूने लेकर बड़ी मात्रा में उत्पाद जब्त किए, जबकि खराब सॉस को मौके पर ही नष्ट करा दिया। छह नमूने किए संग्रहित सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह के निर्देश पर सबसे पहले निराला नगर स्थित सरोज नारायण इंटरप्राइजेज का औचक निरीक्षण किया गया। यहां बिक्री के लिए रखे गए ग्रीन चिली सॉस, स्नैक सॉस और सोया सॉस समेत कुल छह नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। पैकिंग डेट नहीं लिखी थी निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में ग्रीन चिली सॉस और स्नैक सॉस ऐसे मिले, जिन पर पैकिंग तिथि, बेस्ट बिफोर और सामग्री (इंग्रेडिएंट्स) का विवरण अंकित नहीं था। विभाग ने 200 किलोग्राम ग्रीन चिली सॉस (कीमत 20 हजार रुपये) और 100 किलोग्राम स्नैक सॉस (कीमत 12 हजार रुपये) को सीज कर खाद्य कारोबारी की सुपुर्दगी में सुरक्षित रखवा दिया। इसके अलावा Veggius ब्रांड के सोया सॉस, कुलिनरी सॉस और एगलेस मेयोनीज़ के भी नमूने जांच के लिए लिए गए। गंदगी में बनता मिला सॉस इसके बाद टीम ने बैकुंठपुर, बिठूर स्थित स्पार्क होम प्रोडक्ट का निरीक्षण किया। यहां बिना किसी लाइसेंस या पंजीकरण के अत्यधिक गंदगी में रंग मिलाकर सॉस तैयार किया जा रहा था। विभाग ने 380 लीटर चिली सॉस (30,400 रुपये), 200 लीटर टोमेटो सॉस (20 हजार रुपये) और 100 लीटर सोया सॉस (10 हजार रुपये) के नमूने लेकर उन्हें जब्त कर लिया। वहीं करीब 31 हजार कीमत के 380 लीटर खराब सॉस को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। बिना लाइसेंस बना रहे थे सॉस इसी गांव में जीएसएस इंटरप्राइजेज नाम से संचालित एक अन्य सॉस निर्माण इकाई पर भी छापा मारा गया। यहां भी बिना लाइसेंस और गंदगी के बीच रंग मिलाकर सॉस बनाने का काम होता मिला। टीम ने 309 लीटर चिली सॉस (30,940 रुपये), 91 लीटर सोया सॉस (9,100 रुपये) और 52 लीटर वेजिटेबल सॉस (5,200 रुपये) जब्त कर नमूने लिए। इसके अलावा 170 लीटर खराब सॉस, जिसकी कीमत 17,100 रुपये थी, को मौके पर ही नष्ट कराया गया। सैंपल जांच के लिए भेजे गए खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं बिना लाइसेंस संचालित दोनों इकाइयों के विरुद्ध भी नियमानुसार आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।



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