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आगरा नगर निगम में आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों की भर्ती की आड़ में बड़ा घोटाला हुआ है। 1000 सफाई कर्मचारियों की कागजों में भर्ती दिखाकर एक साल तक इनके नाम का नगर निगम का बजट ठिकाने लगाया गया। जबकि किसी भी वार्ड में अतिरिक्त सफाई कर्मचारी पहुंचे ही नहीं। इस पर पार्षदों ने भर्ती के नाम पर 1000 सफाई कर्मचारियों के लिए निर्धारित बजट के बंदरबांट का आरोप लगाया है।
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी को 20 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देनी है।
अब विस्तार से पढ़िये…
नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में 10-10 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों का मुद्दा गर्मा गया है। पार्षदों का आरोप है, नगर निगम में सफाईकर्मियों की नियुक्ति के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। आउटसोर्सिंग पर रखे गए नए 1135 सफाईकर्मियों की सूची मांगी। इसके बाद अफसरों ने उन कर्मचारियों की सूची भेज दी जो कई साल से पार्षदों के वार्ड में तैनात हैं। पार्षदों का कहना है, तीन वर्ष पहले सदन ने शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए हर वार्ड में 10-10 सफाईकर्मी बढ़ाने के लिए बजट आवंटन बढ़ाया था। स्वास्थ्य विभाग ने इस बीच 1135 सफाईकर्मियों को भर्ती दिखाकर वेतन निकालना शुरू कर दिया। आरोप है कि ये कर्मचारी शहर के 100 में से किसी एक वार्ड में भी नहीं पहुंचे। नगर निगम के दो सदनों और तीन कार्यकारिणी बैठकों में पार्षदों ने सफाईकर्मी मांगे थे। अफसरों ने कहा था कि कोई भर्ती नहीं हुई। पार्षदों ने जब उनके वेतन भुगतान के बिल दिखाए तो अधिकारियों ने पिछले दिनों पार्षदों के पास 10-10 सफाईकर्मियों के नाम की सूची भेज दी। इस पर उन्होंने अनुमोदन के लिए हस्ताक्षर मांगे। पार्षदों ने सूची में कर्मचारियों के नाम देखे तो हैरान रह गए। वार्ड के 30 कर्मचारियों में से 10 के नाम नई भर्ती के नाम पर लिखकर भेजे गए थे। पार्षदों ने का कहना था, 1135 कर्मचारियों में से 10 नए कर्मचारियों की सूची दी जाए। 6 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने पार्षदों की मांग पर 6 सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। इसमें अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, सहायक नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी होंगे। तीन पार्षदों रवि बिहारी माथुर, प्रकाश केसवानी और कप्तान सिंह को शामिल किया है। कमेटी 20 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपेगी। नगर निगम में आउट सोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर पार्षदों को गुमराह किया गया है। निगम के बजट को ठिकाने लगाया गया है।
शरद चौहान, पार्षद



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