3 मिनट पहले
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पश्चिम बंगाल STF ने बुधवार सुबह बोंगांव में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास एक संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया। उसकी पहचान राणा राउत के रूप में हुई है।
STF के मुताबिक, राउत भारत में वहाब आलम के नाम से रह रहा था। उसके पास फर्जी पहचान दस्तावेज मिले हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि उसके पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से लंबे समय से संबंध हैं और वह जासूसी व आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है।
2012 में नेपाल के रास्ते भारत आया था
STF सूत्रों के अनुसार, राउत मूल रूप से पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है। वह 2012 में नेपाल के रास्ते भारत आया था और इसके बाद पश्चिम बंगाल में रहने लगा।
जांचकर्ताओं को शक है कि राउत कई साल से ISI के संपर्क में था। प्रारंभिक जांच में उसके वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लीक करने की बात सामने आई है।
रेलवे स्टेशनों और सेना से जुड़े दस्तावेज मिले
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने संवेदनशील सामग्री जब्त की। इसमें देशभर के रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों की आवाजाही और रेलवे पटरियों की तस्वीरें शामिल हैं। भारतीय सेना से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं।
जांचकर्ताओं के अनुसार, राउत ने ये तस्वीरें कई फोन नंबरों पर भेजी थीं। STF अब इन नंबरों से जुड़े लोगों की पहचान कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इन जानकारियों के बदले कोई आर्थिक लेनदेन हुआ था।
जांचकर्ता पश्चिम बंगाल में राउत के संपर्कों की भी जानकारी जुटा रहे हैं। इसके अलावा, यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि बांग्लादेश में सीमा पार कौन व्यक्ति उसे लेने वाला था।
कोलकाता के कारपेंटर ने बनवाए फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में राउत ने बताया कि कोलकाता के टॉपसिया इलाके में रहने वाले एक कारपेंटर ने उसके लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाने में मदद की थी। इनमें वोटर कार्ड और आधार कार्ड शामिल हैं।
STF के अनुसार, भारत आने से पहले राउत और कारपेंटर नेपाल में मिले थे। राउत के बयान के बाद STF ने कारपेंटर को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ जारी है, ताकि नेटवर्क से जुड़े दूसरे संभावित लोगों की पहचान हो सके।
कारपेंटर की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश भागने की कोशिश
STF सूत्रों ने बताया कि कारपेंटर की हाल में आतंकी गतिविधियों से जुड़े शक में गिरफ्तारी हुई थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद राउत ने बांग्लादेश भागने की कोशिश की।
उसकी भागने की योजना को लेकर मिली पक्की सूचना के आधार पर STF ने बुधवार सुबह बोंगांव में तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान राउत को पकड़ा गया।
मंत्री बोलीं- संदिग्ध लोगों की जानकारी तुरंत दें
गिरफ्तारी पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “हमारी सरकार को कार्यभार संभाले अभी सिर्फ तीन महीने हुए हैं। पिछली सरकार ने चुनावी फायदे के लिए अवैध घुसपैठ की अनुमति दी, अब हमारा प्रशासन उससे जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर काम कर रहा है।”
उन्होंने कहा, “इन जड़ जमाए नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने में समय लगेगा। स्लीपर सेल मौजूद हैं। हम सभी नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत अधिकारियों को देने की अपील करते हैं।”
बंगाल STF की कार्रवाई में पहले भी गिरफ्तारियां
राउत की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब बंगाल STF ने हाल में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई की है। पुलिस ने हाल ही में बर्दवान की एक रेजिडेंशियल टाउनशिप से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े संदिग्ध हामिम मंडल को गिरफ्तार किया था।
हामिम पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की आवाजाही पर नजर रखने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने झारखंड से मंडल की सहयोगी अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया।
इसके अलावा, हावड़ा के कॉलेज छात्र आदित्य सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। उस पर मंडल को जानकारी देने का आरोप है।
