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आगरा की मेयर का पूरा ध्यान सिर्फ कमीशनखोरी पर है। अधिकारी सीवर की समस्या पर सोए हुए हैं, उन्हें जगाना पड़ेगा…। यह गुस्सा वार्ड-100 नाई की मंडी के निवासी अनुज शिवहरे का है। वार्ड के ज्यादातर इलाकों के लोगों में इसी तरह की नाराजगी देखने को मिली। दरअसल वार्ड के लोग गंदगी, उफनाते सीवर और जनप्रतिनिधियों की अनसुनी से परेशान हो चुके हैं। गलियों में सीवर का पानी बह रहा है। कई इलाकों में महीनों कूड़ा नहीं उठता। गंगाजल परियोजना की सुविधा न होने की वजह से लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। ऊपर से बंदरों का आतंक ऐसा कि बच्चे खेल नहीं पा रहे और बुजुर्ग घरों से निकलने से डरते हैं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा में लोगों ने खुलकर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि पार्षद और मेयर उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देते हैं। निगम के अधिकारी भी लापरवाही कर रहे हैं। ऐसे में वह कहां जाएं, किससे शिकायत करें। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इस कड़ी में वार्ड-100 का जायजा लिया गया… वार्ड में सीवर के एक गड्ढे को प्राइवेट सफाईकर्मी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मैनहोल में उतरकर साफ करता मिला। लोगों ने बताया कि सीवर की सफाई के लिए कर्मचारी जब सूचना देने के बावजूद नहीं पहुंचे तो निजी कर्मचारी से काम कराया जा रहा है। नाई की मंडी की एक गली में सप्ताहभर से कूड़ा नहीं उठाया गया था। मंदिर के सामने एक स्थानीय व्यक्ति खुद सीवर का गंदा पानी निकालकर मैनहोल साफ करता नजर आया। जलापूर्ति बाधित होने पर लोग गली के बाहर पाइपलाइन से पानी भरते दिखे। हल्का मदन इलाके की गली दो साल से टूटी है। गलियों में घूमते बंदरों से भी स्थानीय लोग परेशान हैं। पहले ये नजारा देखिए…
सीवर लाइनें जाम, नालियां चोक वार्ड के अधिकांश हिस्सों में सीवर लाइनें जाम हैं। कई स्थानों पर सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहता मिला, जबकि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से जलनिकासी पूरी तरह प्रभावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाई की मंडी और आसपास के इलाकों में यह समस्या वर्षों पुरानी है। कई जगह नालियों की दीवारें और पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वार्ड की बड़ी समस्याएं सीवर ओवरफ्लो: पुरानी और जाम सीवर लाइनों के कारण कई जगह सीवर सड़क पर बह रहे हैं। चोक नालियां और जलभराव: नालियों की सफाई नहीं होने से हल्की बारिश में भी गलियां डूब जाती हैं। पेयजल संकट: गंगा जल की लाइन नहीं है और कई इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। टूटी सड़कें और खुले मैनहोल: सड़कें जर्जर हैं और कई जगह खुले मैनहोल हादसे का खतरा बने हुए हैं। बंदरों का आतंक: बंदरों के हमलों से लोग भय में जी रहे हैं और बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लोग बोले- नहीं होती सीवर की सफाई स्थानीय निवासियों ने बताया कि सीवर का पानी घरों तक पहुंच जाता है। शिकायत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। वैष्णवी ने कहा कि कई-कई दिन तक सफाई नहीं होती और पीने के पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। बारिश में गलियां बन जातीं तालाब लोगों ने बताया कि हल्की बारिश में भी गलियों और सड़कों पर एक से तीन फीट तक पानी भर जाता है। कई घरों में भी पानी घुस जाता है। जलनिकासी व्यवस्था खराब होने के कारण हर बरसात में यही हालात बनते हैं। कुछ स्थानों पर लोगों को पानी से बचने के लिए गली में तख्त या किवाड़ रखकर निकलना पड़ता है। गंगा जल नहीं, दूषित पानी पीने को मजबूर लोग हल्का मदन सहित कई इलाकों में आज तक गंगा जल परियोजना की लाइन नहीं पहुंची है। जहां पानी की सप्लाई होती है, वहां सीवर मिश्रित बदबूदार पानी आने की शिकायत है। लोगों का कहना है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में पीने का पानी बाजार से खरीदना पड़ता है। जिन क्षेत्रों में गंगा जल की लाइन है, वहां भी नियमित सप्लाई नहीं होती। बंदरों के आतंक से घरों में कैद लोग वार्ड में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार हर दो-तीन दिन में किसी न किसी पर बंदर हमला कर देते हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम की टीम वर्षों पहले एक-दो बंदर पकड़कर चली गई थी। उसके बाद दोबारा कोई अभियान नहीं चलाया गया। सफाई व्यवस्था चरमराई, गलियों में कूड़े के ढेर संकरी गलियों में कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नियमित नहीं पहुंचती। सफाईकर्मियों की कमी के कारण कई जगह एक-एक सप्ताह तक कूड़ा नहीं उठता। कूड़ा नालियों में गिरकर उन्हें चोक कर देता है, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है। बदबू और बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।



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