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कोलकाता/नई दिल्ली8 मिनट पहले
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BJP विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। दरअसल, सोनिया ने स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् को रुकवाने का इशारा किया था।
चटर्जी का दावा है कि वहां वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाने को लेकर असहजता दिखाई गई और इसे रोकने की बार-बार कोशिश हुई।
नैहाटी से BJP विधायक चटर्जी ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में खुद को आम नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का सीधा वंशज बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना पर उन्हें गहरा दर्द, खालीपन और गुस्सा आ रहा है।
पहले देखिए कांग्रेस मुख्यालय की वीडियो क्लिप…

चटर्जी बोले- कांग्रेस ने ऐतिहासिक गलती दोहराई
चटर्जी ने पत्र में लिखा- 15 अगस्त की घटना केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराने जैसी है। उन्होंने श्री अरविंद के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम को देश को ‘देशभक्ति के धर्म’ में दीक्षित करने वाला मंत्र बताया था।
उन्होंने कहा कि आजाद भारत की धरती पर वंदे मातरम को पूरा गाने में कथित अनिच्छा, खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।
आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम की भूमिका गिनाई
चटर्जी ने कहा कि वंदे मातरम का आजादी की लड़ाई में खास महत्व रहा है। उन्होंने बताया कि 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसका पाठ किया था।
उन्होंने कहा कि 1909 में बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने उनके राजद्रोह मुकदमे की सुनवाई के दौरान वंदे मातरम गाया था। 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में निजाम की पाबंदियों के बावजूद राष्ट्रवादी छात्रों ने इसे नारे की तरह इस्तेमाल किया था।
चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर की ओर से वंदे मातरम गाए जाने का भी जिक्र किया।
कांग्रेस की ‘दोहरी नीति’ पर सवाल उठाया
चटर्जी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘कथित दोहरी नीति’ कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि 1937 में पार्टी ने मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुककर उसी साल अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया था।
उन्होंने कहा कि उस समझौते की परछाई एक बार फिर कांग्रेस के आचरण में दिखाई दे रही है।
चटर्जी ने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के छात्र संगठन छात्र परिषद के नारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र परिषद ‘मंत्र मोदेर संजीवन, वंदे मातरम’ नारे का इस्तेमाल करती है। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है।
‘वंदे मातरम किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं’
चटर्जी ने कहा कि वंदे मातरम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। यह देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर विरासत और शहीदों के खून व बलिदान से मिला पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास का सम्मान करने के बराबर है। चटर्जी ने चेतावनी दी कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता।
उन्होंने कहा कि जो नेतृत्व अपने ही स्वतंत्रता मंत्र का सम्मान करने में नाकाम रहता है, उसे इतिहास भुला दिए जाने के अंधेरे में धकेल देगा।
चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। उन्होंने सोनिया गांधी से आत्ममंथन करने और सभी देशवासियों, खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की।
