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बलरामपुर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। रविवार को एक निजी मैरिज लॉन में हुई इस सभा में सैकड़ों लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था। इस कार्यक्रम का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी की पारिवारिक सदस्य और भाजपा नेत्री अंजली मिश्रा ने किया था। श्रद्धांजलि सभा में गोंडा सदर विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह, बलरामपुर सदर विधायक पल्टूराम, तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, पूर्व सांसद एवं श्रावस्ती जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मिश्रा सहित बड़ी संख्या में भाजपा नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आमजन उपस्थित थे। वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, कृतित्व और बलरामपुर से उनके गहरे रिश्ते को याद किया। उन्होंने बताया कि बलरामपुर वह भूमि है जिसने अटल बिहारी वाजपेयी के संसदीय जीवन को पहली बड़ी पहचान दी। अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में पहली बार बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने 1967 में भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। यह ऐतिहासिक संबंध आज भी बलरामपुर के निवासियों के मन में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति गहरी श्रद्धा का आधार है। सभा को संबोधित करते हुए गोंडा सदर के विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी को केवल माला चढ़ाकर याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनसे कुछ मांगना भी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें अटल जी से धैर्य मांगना चाहिए।” विधायक ने अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने दशकों तक अपनी विचारधारा से समझौता किए बिना संघर्ष किया। उन्होंने जोर दिया, “अटल जी जैसा बनने के लिए 40 साल इंतजार करने का धैर्य चाहिए, व्यक्तित्व और विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए।” प्रतीक भूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी बलरामपुर में कोई विरासत, धन या वैभव लेकर नहीं आए थे, बल्कि “विचार, चरित्र और धैर्य” लेकर आए थे। उनके अनुसार, आज की राजनीति में शोर, जल्दबाजी और शॉर्टकट बढ़ गए हैं, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी मर्यादा, संयम और सिद्धांतों के पर्याय थे। विधायक ने अटल बिहारी वाजपेयी की विकास दृष्टि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वर्णिम चतुर्भुज, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और सर्व शिक्षा अभियान जैसी पहलों ने देश की बुनियादी तस्वीर बदल दी थी।



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