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- Delhi Police Pellet Gun Action Case; CJP Jantar Mantar Protest | Supreme Court
नई दिल्ली17 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैलेट गन के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस विशेष स्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल कर सकती है।
कोर्ट ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत देने वाले पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस पर रोक लगाने का आदेश देना मुश्किल है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें दावा किया गया था कि 20 जुलाई के संसद मार्च में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर पैलेट गन चलाई थी।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि प्रदर्शन में घायल सभी लोगों को अच्छी और पूरी चिकित्सा सुविधा दी जाए।
20 जुलाई के संसद मार्च की 2 तस्वीरें…

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया,आंसू गैस के गोले छोड़े, पथराव भी हुआ।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हुए। 100 से ज्यादा लोगों क चोटें आईं थीं।
भास्कर नॉलेजः भारत में पैलेट गन को लेकर क्या नियम हैं?
- भारत में पैलेट गन पर पूरी तरह बैन नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए गृह मंत्रालय (MHA) के दिशा-निर्देशों के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अपनाई है।
- सरकार के मुताबिक, पैलेट गन कम घातक हथियार है, जिसका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
- नियमों के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर पुलिस पहले कम नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे तरीके अपनाती है। अगर उनसे भीड़ काबू में नहीं आती, तभी आखिरी विकल्प के तौर पर पैलेट गन जैसे कम-घातक हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- गृह मंत्रालय ने कहा कि पैलेट गन का इस्तेमाल सिर्फ उतना ही किया जाए, जितना हालात को काबू में करने के लिए जरूरी हो। कार्रवाई के दौरान आम लोगों और सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।
- इसके लिए जवानों को खास प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि हथियार का इस्तेमाल नियमों के अनुसार और कम से कम नुकसान के साथ हो।

