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मुजफ्फरनगर कोर्ट ने सोमवार को 16 साल पुराने हत्याकांड में दो मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। इनमें से पूर्व प्रधान प्रमोद चौधरी, एडिशनल एसपी अनुज चौधरी का ममेरा भाई है। घटना तितावी इलाके के माड़ी गांव में 2010 के प्रधानी चुनाव के दौरान हुई थी। पुलिस ने हत्याकांड के दो आरोपियों को 18 जनवरी, 2011 में एनकाउंटर में मार गिराया था। जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा- ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होती है। यहां लोगों के वोट और बैलेट पेपर की इज्जत सबसे ऊपर होनी चाहिए। अगर चुनावी रंजिश में खून-खराबा लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर हमला है। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। हत्याकांड में मारे गए राजवीर सिंह के घरवालों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि हम लोगों को 16 साल बाद इंसाफ मिला। यह हमारी लगातार लड़ाई का नतीजा है। वहीं, गांव के लोगों ने भी कोर्ट के फैसले को न्याय बताया। अब वो हत्याकांड जानिए, जिसमें फांसी की सजा हुई घटना 24 अगस्त, 2010 की है। ग्राम मांडी के रहने वाले राजवीर सिंह (60) प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उस समय का प्रधान प्रमोद चौधरी इस बात से रंजिश रखता था। घटना वाले दिन सुबह करीब सवा सात बजे राजवीर सिंह अपने खेत की तरफ जा रहे थे। तभी मांडी के जंगल में पहले से घात लगाए बैठे प्रमोद, उसका साथी सहदेव और उनके दो शूटर अमित और विपिन शर्मा ने राजवीर को घेर लिया। हत्यारे बोले- तुझे गांव का अगला प्रधान बना देते हैं हथियारों से लैस हत्यारों ने राजवीर के साथ गाली-गलौज की और कहा- बहुत बड़ा आदमी बनता है, आ तुझे गांव का अगला प्रधान बना देते हैं। इसके बाद उन्होंने राजवीर पर पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस वारदात को खेतों की तरफ जा रहे दो ग्रामीणों- सुकेन्द्र और सत्यवीर ने अपनी आंखों से देख लिया। जब उन्होंने शोर मचाया तो हमलावरों ने उन पर भी फायर किया और धमकी देते हुए फरार हो गए। दहशत के मारे दोनों चश्मदीद शाम तक गन्ने के खेत में छिपे रहे। शुरुआत में राजवीर के बेटे प्रदीप ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन बाद में गवाहों के सामने आने पर आरोपियों के नाम सामने आ गए। दो आरोपियों का एनकाउंटर, पुलिस को मिले सबूत जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वारदात में शामिल दो अन्य शूटर अमित और विपिन शर्मा का आपराधिक रिकॉर्ड भी था। 17-18 जनवरी 2011 की रात शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में दोनों मारे गए। इसके चलते उनके खिलाफ चल रही जांच बंद कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी प्रमोद ने गवाह संजीव कुमार के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया था कि हत्या पुरानी रंजिश के चलते की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने दोषी माना पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर संजय भटनागर ने बताया कि राजवीर सिंह के शरीर पर कुल 7 गनशॉट इंजरी (5 एंट्री और 2 एग्जिट वुंड) पाई गईं थीं। चेहरे, गर्दन और छाती पर बेहद करीब से गोली मारे जाने के निशान मिले थे। कोर्ट ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही एक-दूसरे की पुष्टि करती हैं। कोर्ट ने सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद को राजवीर सिंह की हत्या का दोषी करार दिया। इसके बाद दोनों को फांसी की सजा सुनाई। पुलिस से मिलकर सबूत गायब कराए सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा भी सामने आया। कोर्ट में बताया गया कि केस के सबसे अहम सबूत, घटनास्थल से बरामद 32 बोर के चार खोखा कारतूस, तितावी थाने के मालखाने से ही गायब हो गए। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने पुलिस से मिलीभगत कर ये सबूत गायब कराए। मामले के विवेचक ने भी अदालत में स्वीकार किया कि ये कारतूस मालखाने से गायब हैं। SSP को कोर्ट का सख्त आदेश इस मामले को अदालत ने बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के एसएसपी को निर्देश दिया कि मालखाने से सबूत गायब होने की जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही जिन पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। ——————————— ये खबर भी पढ़ेंः- राम मंदिर चढ़ावा चोरी-चंपत राय का इस्तीफा मंजूर:कृष्ण मोहन नए महासचिव; ट्रस्ट ने 4 सोने-चांदी की वस्तुएं दिखाईं, इनकी चोरी का दावा था अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय की जगह नए ट्रस्टी रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। कृष्ण मोहन दलित समाज से हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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