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हम चाहकर भी विकास नहीं करा सकते। यह पुराना शहर है, पुरानी गलियां हैं और इस वार्ड का स्वरूप बदला नहीं जा सकता…। ये कहना है वार्ड-96 दशाश्वमेध के पार्षद नरसिंह बाबा का। लेकिन उनकी इस बात से इतर यहां रहने वाले लोग अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि रास्ते संकरे और खराब हैं। कोई सीवर व्यवस्था नहीं है। घरों में बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है। वार्ड परिक्रमा के दौरान भी विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और शक्तिपीठ विशालाक्षी मंदिर के बीच सीवर का पानी सड़कों पर बहता मिला। टूटी गलियों से बाबा की आरती का डोला गुजरता दिखा। कई मोहल्लों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान मिले। स्थानीय लोगों का आरोप है कि श्रद्धालु खराब रास्तों पर गिरकर घायल हो रहे हैं। कई घाटों से गंदा पानी सीधे गंगा में बहता दिखाई देता है। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-96 दशाश्वमेध का जायजा लिया गया… मानमहल घाट की सीढ़ियों से सीवर का गंदा पानी सीधे गंगा में बहता मिला। विशालाक्षी देवी मंदिर जाने वाली गली में कई जगह चौका उखड़ा हुआ नजर आया, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती दिखी। दशाश्वमेध घाट पर रोज होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे थे। बाबा विश्वनाथ की आरती का डोला भी क्षतिग्रस्त और उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरता नजर आया। पहले ये नजारा देखिए… टूटी गलियां बनी सबसे बड़ी परेशानी अगस्त्यकुंड, धर्मकूप, त्रिपुरा भैरवी मंदिर और बंगाली टोला क्षेत्र में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। कई स्थानों पर सीवर के ढक्कन टूटे पड़े हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन्हीं रास्तों से प्रतिदिन श्रद्धालु और बाबा विश्वनाथ की आरती का डोला गुजरता है, लेकिन लंबे समय से मरम्मत नहीं कराई गई। श्रद्धालुओं की भीड़ से स्थानीय लोगों की मुश्किलें वाराही देवी और विशालाक्षी मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से लंबी कतारें लगती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भीड़ के कारण बच्चों को स्कूल छोड़ने और घर से निकलने तक में परेशानी होती है। कई बार श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद और मारपीट की नौबत भी आ जाती है। वार्ड की बड़ी समस्याएं सीवर ओवरफ्लो: कई गलियों में सीवर का पानी सड़क पर बहता है। टूटी सड़कें और गलियां: उखड़े चौके और क्षतिग्रस्त रास्तों से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। पेयजल संकट: कई इलाकों में महीनों से पानी नहीं आ रहा, कई जगह गंदा पानी मिल रहा है। खुले मैनहोल: टूटे और खुले सीवर ढक्कन हादसों का कारण बने हुए हैं। गंदगी और मलबा: पर्यटन क्षेत्र होने के बावजूद कई स्थानों पर कूड़ा और मलबा जमा है। श्रद्धालुओं की भीड़: मंदिरों की कतारों से स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। कहीं पानी नहीं तो कहीं गंदा पानी मीरघाट, धर्मकूप और बंसी की गली समेत कई इलाकों में पेयजल संकट गंभीर है। बच्चे लाल ने बताया कि नई पाइपलाइन बिछने के बाद कई घरों में पानी आना ही बंद हो गया, जबकि कई स्थानों पर शुरुआत में गंदा और मटमैला पानी आता है। लोगों का कहना है कि मजबूरी में पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है या मंदिरों और मठों से पानी लाना पड़ता है। पर्यटन स्थल होने के बावजूद गंदगी की समस्या वार्ड में दिन में दो बार सफाई होने का दावा किया जाता है, लेकिन कई गलियों में कूड़ा और मलबा जमा मिला। लोगों का कहना है कि समय पर कूड़ा नहीं उठने से बारिश में फिसलन बढ़ जाती है और श्रद्धालुओं को भी परेशानी होती है। घाट साफ, लेकिन गंगा में गिरता मिला मल-जल दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद और मानमहल घाट जैसे प्रमुख घाटों की सफाई व्यवस्था संतोषजनक दिखी, लेकिन कई स्थानों पर सीवर और मल-जल गंगा में गिरता नजर आया। स्थानीय लोगों ने इसे गंभीर पर्यावरणीय समस्या बताया। ————— ये खबर भी पढ़िए… 31 साल से एक ही पार्षद, फिर भी डूबतीं सड़कें:वार्ड-68 में उफना रहे सीवर; पेयजल को तरस रहे लोग, दूसरे मोहल्लों से ला रहे पानी वाराणसी के कोनिया वार्ड में 31 साल से एक ही पार्षद हैं, फिर भी समस्याएं हल नहीं हो सकीं। सीवर उफना रहे हैं। सड़कें पानी में डूब रही हैं। लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। गंदा और बदबूदार पानी नलों से निकल रहा है। कुछ जगहों पर लोग नहाने के लिए दूसरे मोहल्लों तक जा रहे हैं। रहमतनगर 16 साल से पानी की समस्या झेल रहा है। धोबीघाट में सड़क और सीवर बनने के बाद मकान नीचा पड़ गया, और विजयीपुरा में लोग खरीदकर पानी पीने को मजबूर हैं। पूरी खबर पढ़ें… ————— ये खबर भी पढ़िए… वार्ड-88 में लोग बोले-द्वेष भावना से काम करा रहे पार्षद:10 महीने से 150 परिवार साफ पानी को तरस रहे; धर्म के आधार पर सुविधाएं देने का आरोप वाराणसी का सबसे घनी आबादी वाला वार्ड-88 सुविधाओं में बहुत पिछड़ा नजर आ रहा है। कुछ हिस्सों की हालत ज्यादा खराब है। यहां के लोगों का कहना है कि पार्षद द्वेष भावना से काम कर रहे हैं। धर्म के आधार पर लोगों को लाभ दिया जा रहा है। काल भैरव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बसे वार्ड बलुआबीर में न तो पीने का साफ पानी है न ही सीवर व्यवस्था। चिकवन टोला में 10 महीने से मिनी ट्यूबवेल खराब है। 150 से अधिक परिवारों को इससे परेशानी हो रही है। नलों से सीवर मिला बदबूदार पानी आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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