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चंदौली में जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को उन्नत प्रजाति के फलदार पौधे उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है। इसके लिए इच्छुक किसानों को पहले केवीके में पंजीकरण कराना होगा। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रमाणित पौधों के उपयोग से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन के साथ आय में भी वृद्धि होगी। केवीके परिसर की नर्सरी में कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में आम, अमरूद, कटहल, नींबू, आंवला, बेल, अनार, जामुन, किन्नू, लीची, ड्रैगन फ्रूट, वाटर एप्पल और एप्पल बेर सहित कई फलदार पौधों की उन्नत किस्में तैयार की गई हैं। किसानों को ये पौधे नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जो बाजार कीमत से काफी कम है। अमरूद और आम की कई उन्नत किस्में तैयार नर्सरी में अमरूद की ललित, श्वेता, इलाहाबाद सफेदा, हिसार सफेदा, सरदार, लखनऊ-49, धवल और ताइवान पिंक किस्में उपलब्ध हैं। वहीं आम की दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, मल्लिका, अंबिका, अरुणिका, पूसा अरुणिमा और पूसा लालिमा जैसी उन्नत प्रजातियों के कलमी पौधे भी तैयार हैं। पौधों की तय की गई कीमतें केवीके ने विभिन्न पौधों की कीमतें भी निर्धारित की हैं। आम के कलमी पौधे 100 से 175 रुपये, अमरूद 30 से 70 रुपये, आंवला और बेल 90 रुपये, नींबू 60 रुपये, अनार और जामुन 50 रुपये, किन्नू 100 रुपये, लीची 60 रुपये, ड्रैगन फ्रूट 50 रुपये तथा कटहल 100 रुपये प्रति पौधा उपलब्ध कराया जाएगा। वैज्ञानिक विधि से बागवानी अपनाने की अपील कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं कृषि वैज्ञानिक नरेंद्र रघुवंशी ने किसानों से प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त पौधों का उपयोग कर वैज्ञानिक तरीके से बागवानी अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों के फलदार पौधों से उत्पादन बेहतर होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।



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