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वाराणसी जिला कोर्ट ने ई-रिक्शा की डीलरशिप की आड़ में कथित तौर पर नकली चेसिस का कारोबार केस की सुनवाई शुरू हो गई है। मुन्ना बजरंगी गैंग से जुड़े बताए जा रहे हिस्ट्रीशीटर पिंचू मारवाड़ी और अन्य आरोपियों से जुड़े नेटवर्क की जांच के बीच प्रतीक सर्राफ समेत आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। फरार आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए वाराणसी की अपर सत्र न्यायाधीश संख्या-4 सरबजीत सिंह की अदालत में अंतरिम अग्रिम जमानत की मांग की थी। न्यायालय ने मामले के तथ्यों की गंभीरता और आरोपी के पुराने आपराधिक इतिहास को देखते हुए राहत देने का कोई आधार नहीं माना। बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने जमानत की दलील दीं तो वादी मुकदमे के अधिवक्ता धीरेन्द्र प्रताप सिंह एवं धर्मेंद्र यादव ने विरोध जताया। लंबी बहस के बाद जज ने याचिका को खारिज कर दिया। बिना ट्रेड सर्टिफिकेट 26 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड प्रकरण में अनघ शुक्ला की ओर से बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के 26 ई-रिक्शा का पंजीयन कराए जाने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद मामला ई-रिक्शा डीलरशिप की आड़ में कथित नकली चेसिस के इस्तेमाल और वाहनों के पंजीयन से जुड़े गंभीर आरोपों तक पहुंचा। लखनऊ के अधिवक्ता की शिकायत पर शासन स्तर से आदेश जारी होने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच की थी। संबंधित डीलर को काली सूची में डालने की कार्रवाई की थी। परिवहन विभाग की जांच और शिकायत की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कमिश्नर स्तर से भी मामले की जांच कराई गई। जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। वाहन बरामदगी पुलिस के लिए बनी बड़ी चुनौती मामले में कथित रूप से इस्तेमाल किए गए वाहनों और उनसे जुड़े साक्ष्यों की बरामदगी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस के सामने गिरोह से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ उन वाहनों को बरामद करना भी अहम है, जिनके चेसिस नंबर और पंजीयन को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी और वाहनों की बरामदगी के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है। हालांकि, अब तक पुलिस के हाथ आरोपियों और वाहनों की बरामदगी के मामले में खाली बताए जा रहे हैं। फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। मामले में हिस्ट्रीशीटर पिंचू मारवाड़ी के कथित आपराधिक नेटवर्क और मुन्ना बजरंगी गैंग से उसके संबंधों का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में पुलिस जांच का दायरा केवल ई-रिक्शा और चेसिस तक सीमित रहने के बजाय आरोपियों के आपसी नेटवर्क और पूरे कारोबार की गतिविधियों तक पहुंचने की संभावना है।
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