![]()
उन्नाव की एडीजे-प्रथम अदालत ने करीब 10 साल पुराने युवती हत्याकांड में दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मंगलवार को जिले की अलग-अलग अदालतों ने 3 पुराने मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए आरोपियों को दोषी ठहराया। मौरावां थाना क्षेत्र के टोपरा गांव निवासी रामू की पुत्री आरती देवी वर्ष 2016 में हरियाणा के करनाल से मायके आई थीं। अभियोजन के अनुसार, 4 अक्टूबर 2016 को वह घर से सामान देने की बात कहकर निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। करीब 10 दिन बाद 14 अक्टूबर को पिंजरा गांव के पास झाड़ियों में एक महिला का शव मिला। कपड़ों के आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान आरती देवी के रूप में की। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को ठहराया दोषी विवेचना के दौरान पुलिस ने महरानीखेड़ा गांव निवासी विमलेश यादव को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई एडीजे-प्रथम कविता मिश्रा की अदालत में हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुशवाहा ने अभियोजन की ओर से साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने विमलेश यादव को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पिता की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा मृतका के पिता रामू ने तहरीर में बताया था कि उनकी बेटी मायके आने के अगले दिन घर से निकली थी और फिर लापता हो गई। बाद में जंगल में मिला शव कपड़ों, चूड़ियों और चप्पलों से पहचाना गया। उन्होंने बेटी की हत्या कर शव फेंके जाने का आरोप लगाया था, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी। दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी अनूप निवासी दमगढ़ी, थाना सफीपुर को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 21 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यह मामला वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था। विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। दहेज प्रताड़ना मामले में छह माह की कैद सीएडब्ल्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वर्ष 2001 के दहेज प्रताड़ना मामले में आरोपी रामऔतार निवासी दबौली, थाना फतेहपुर चौरासी को छह माह के कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। आरोपी के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज था। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
Source link