लखनऊ9 मिनट पहले
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भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, संगीत मिलन और भातखंडे एलुमनी एसोसिएशन के सहयोग से ‘क्लासिकल वॉयस ऑफ अवध-2026’ का शुभारंभ हो गया। यह दो दिवसीय संगीत कार्यक्रम है। उद्घाटन रामकृष्ण मिशन के स्वामी मुक्तिनाथानंद ने किया।
उद्घाटन सत्र में स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि आज के तनावपूर्ण दौर में ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सहज माध्यम संगीत है। संगीत व्यक्ति को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करता है।

भातखंडे एलुमनी एसोसिएशन ने भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में कार्यक्रम कराया।
खयाल और ठुमरी में प्रतिभागी ने प्रस्तुति दी
प्रतियोगिता के पहले दिन वाद्य संगीत वर्ग में सात प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दी। वहीं, गायन वर्ग में खयाल और ध्रुपद श्रेणी में 26 और ठुमरी में एक प्रतिभागी ने अपनी प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों ने वृंदावनी सारंग, मधुवंती, बिहाग, जौनपुरी और भीमपलासी जैसे लोकप्रिय रागों की पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
ये मौजूद रहे
प्रतियोगिता में लखीमपुर खीरी, लखनऊ, कानपुर, हरदोई और अयोध्या सहित कई शहरों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। गायन वर्ग का मूल्यांकन पंडित मिलन देबनाथ, डॉ. सीमा भारद्वाज, प्रो. सौभाग्य वर्धन (चंडीगढ़) और डॉ. राम शंकर सिंह (बीएचयू, वाराणसी) ने किया। वाद्य संगीत वर्ग के निर्णायक डॉ. सुजीत देवघरिया (बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान) और पंडित अभिजीत रायचौधरी (लखनऊ) रहे।
