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लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या-102 में 22 जून को हुए अग्निकांड मामले में अब कार्रवाई निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भवन स्वामी की ओर से बुधवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की विहित प्राधिकारी कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया गया। जवाब दाखिल होने के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार तय की है। इसी दिन यह फैसला होगा कि भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई होगी या नहीं। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकीलों ने कोर्ट से जवाब पर विस्तृत सुनवाई के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की मांग की। हालांकि, विहित प्राधिकारी ने लंबी मोहलत देने से इनकार करते हुए गुरुवार की तारीख तय कर दी। अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट अपना आदेश सुनाएगी। यह मामला 22 जून को हुए उस भीषण अग्निकांड से जुड़ा है, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए की जांच में भवन निर्माण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके आधार पर भवन स्वामी को नोटिस जारी किया गया था और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। दूसरी ओर, मामले की जांच कर रही एसआईटी की पड़ताल में भी लगातार नई लापरवाहियां सामने आ रही हैं। जांच में पता चला है कि जहां भवन में फायर एग्जिट और लोहे की सीढ़ियां होनी चाहिए थीं, वहां लिफ्ट लगा दी गई थी। इसके अलावा भवन में स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली लोड का इस्तेमाल और मानचित्र के विपरीत अतिरिक्त निर्माण भी जांच में सामने आया है। एलडीए पहले ही भवन निर्माणकर्ताओं पर करीब 91.25 लाख रुपये का दंड और 50 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगा चुका है। साथ ही भवन से जुड़े 18 इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी एसआईटी के जांच दायरे में है। अब सबकी नजर गुरुवार को आने वाले एलडीए कोर्ट के फैसले पर है। यदि कोर्ट ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रखती है तो अग्निकांड के बाद यह इस मामले की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होगी।
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