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बुलंदशहर के एक युवक को मलेशिया में नौकरी के नाम पर दो लाख रुपए में बेच दिया गया। उसको बुलंदशहर से दिल्ली और फिर वहां से फ्लाइट से थाईलैंड भेजा गया। इसके बाद युवक को डंकी रूट (जंगल के रास्तों) से मलेशिया भेजा गया। इस दौरान उसे न खाना-पानी तक नहीं दिया गया। मलेशिया पहुंचने के बाद युवक को एक तमिल व्यक्ति के हवाले कर दिया गया। 17 अप्रैल को भारत से निकले युवक को 71 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। इसी बीच बंधक बने युवक ने किसी तरह भारत में पत्नी को फोन कर सारी बात बताई। इसके बाद पत्नी बुलंदशहर एसएसपी के पास पहुंची। आखिरकार, घरवालों ने भारत से 50 हजार रुपए का इंतजाम कर मलेशिया भेजा। तब जाकर युवक की घर वापसी का टिकट हुआ। इसके बाद वह 26 जून को भारत लौटा। दैनिक भास्कर की टीम पूरे मामले को जानने के लिए युवक के घर पहुंची। साथ ही एसपी क्राइम ने नरेश कुमार से बात की। एसपी ने बताया कि एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पहले पूरा मामला जानिए… यह मामला 12 जून को तब सामने आया, जब पीड़ित शहाब रिजवी की पत्नी नौशीन रिजवी ने बुलंदशहर के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। शहाब परिवार के साथ बुलंदशहर के शांति नगर (भूड़) में रहते हैं। घर में पत्नी, 2 बच्चे और उनकी मां हैं। कुछ समय पहले शहाब सऊदी अरब से काम करके लौटे थे। इसके बाद किसी और देश में जाने के लिए वीजा की तलाश कर रहे थे। शहाब का मोहल्ले के डॉक्टर फजलू के पास उठना-बैठना था। फजलू भी शांति नगर में रहता है। एक दिन डॉक्टर ने उन्हें मलेशिया में कंप्यूटर आपरेटर की जॉब के बारे में बताया। इस पर शहाब ने नौकरी करने में इच्छा जताई। डॉक्टर ने एक एजेंट और मलेशिया जाने के कुल खर्च के बारे बताया। शहाब अपने घरवालों और कुछ रिश्तेदारों से 2 लाख रुपए इकट्ठे किए। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर और एजेंट को 2 लाख रुपए दे दिए। इसके बाद डॉक्टर ने नई दिल्ली के तैमूरनगर में रहने वाले अकबर इलाही से शहाब की बात कराई। फिर शहाब अपने दिल्ली रवाना हो गए। वहां पहुंचने के बाद दूसरे एजेंट से उनकी मुलाकात हुई। वहां सारे दस्तावेज तैयार किए गए। वहां उनसे और रुपए लिए गए, फिर इंडिगो की फ्लाइट का टिकट दिया गया। अब पढ़िए शहाब ने जो कुछ बताया एजेंटों के गुर्गों ने मेरा पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिया शहाब बताते हैं- मैं 15 अप्रैल को दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट (6E-1069) से थाईलैंड गया। मुझे लगा कि आगे का सफर सामान्य होगा। लेकिन, थाईलैंड पहुंचते ही एजेंटों के गुर्गों ने मुझे घेर लिया। वे मुझे जंगलों के रास्ते अवैध रूप से (डंकी रूट) मलेशिया ले गए। वहां पहुंचते ही सबसे पहले मेरा पासपोर्ट और मोबाइल फोन छीन लिया गया। मलेशिया पुलिस ने भी मेरी मदद नहीं की शहाब ने बताया- मुझे मलेशिया के सुबंग जाया इलाके में एक बेहद सुनसान और वीरान जगह पर बंधक बनाकर रखा गया। वहां मुझसे बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी। मना करने पर मारा-पीटा जाता था। लगातार 3 दिन तक मुझे खाना-पानी तक नहीं दिया गया। मलेशिया पुलिस से भी मुझे कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद किसी तरह जान बचाकर मैंने एजेंटों के चंगुल से खुद को छुड़ाया। फिर छिपकर फोन से अपनी पत्नी नौशीन रिजवी से संपर्क किया। इसके बाद नौशीन ने बुलंदशहर एसएसपी से गुहार लगाई। इसी बीच घरवालों ने पैसे का इंतजाम कर मलेशिया भेजे, जिससे मेरी वापसी का टिकट हुआ। मैं 26 जून को भारत लौटा हूं। मुझे 2 दिन अलग-अलग होटलों में रखा शहाब ने बताया- 15 अप्रैल को मैं थाईलैंड पहुंचा था। वहां मुझे 2 दिन अलग-अलग होटलों में रखा गया। 17 अप्रैल की सुबह मुझे जंगल के रास्ते थाईलैंड का बॉर्डर क्रॉस कराया और मलेशिया में अवैध रूप से एंट्री कराई। मलेशिया में मुझे एक दूसरा एजेंट मिला। वह मुझे बस से राजधानी कुआलालंपुर लेकर गया। इसके बाद बस स्टैंड पर मुझे रिसीव करने एक नया एजेंट आया। उसने कार से मुझे सुबंग जया तक पहुंचाया। पत्नी नौशीन बोलीं- सरकार का बहुत सहयोग मिला : नौशीन रिजवी पत्नी नौशीन रिजवी ने बताया- मेरे पति को 71 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। मेरे ही मोहल्ले के एक एजेंट फजलू ने पति को एजेंट से मिलवाया था। उसके बाद मजदूर बनाकर उनसे काम कराया, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए उनका सिलेक्शन हुआ था। उन्होंने कहा कि एसएसपी से बहुत सहयोग मिला। इसके बाद हमें मलेशिया में एक एजेंट मिला, जो भारतीय था। उसने ही पति का टिकट वगैरह कराया। मैंने भारत से एजेंट के खाते में पैसे डाले। इसके बाद पति का टिकट हुआ, फाइन चार्ज हुआ। तब जाकर वह इंडिया वापस आ पाए। जानिए पत्नी कैसे पति को इंडिया वापस बुला पाई एसपी क्राइम बुलंदशहर नरेश कुमार ने बताया- 12 जून को नौशीन रिजवी ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि उनके पति शहाब को नौकरी का झांसा देकर मलेशिया भेजा गया है। लालच दिया गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर बनाया जाएगा। लेकिन, जब शहाब वहां पहुंचे, तो उनको बंधुआ मजदूर बना लिया गया। उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। उनसे मजदूरों की नौकरी कराई गई। इस सूचना पर साइबर थाने ने भारत सरकार के जरिए मलेशिया उच्चायोग (हाई कमीशन) से संपर्क किया और उसकी वापसी के लिए प्रयास किए। सभी आरोपियों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। —————————— यह खबर भी पढ़ें यूपी में रिटायर्ड ARTO के घर 13kg सोना,9kg चांदी मिली, विजिलेंस के छापे में हीरे भी मिले यूपी में रिटायर्ड सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर विजिलेंस ने छापा मारा। करीब 26 घंटे चली छापेमारी में ललित कुमार के लखनऊ आवास से 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और हीरे के आभूषण बरामद किए हैं। जिनकी कीमत 20 करोड़ रुपए आंकी गई है। यहां पढ़ें पूरी खबर
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