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ललितपुर के बुढ़वार ग्राम के मजरा जनकपुर टपरियन के 50 से अधिक ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, बुधवार दोपहर 3 बजे मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अपने गांव को जाने वाले मार्ग की बदहाली और जलभराव की समस्या को लेकर जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि जनकपुर टपरियन के लिए एक किलोमीटर का मार्ग वन विभाग और ग्राम समाज की भूमि से होकर गुजरता है। पक्का मार्ग न होने के कारण बारिश में इस रास्ते पर जलभराव और कीचड़ हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों सहित अन्य ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, यह मार्ग उनके पूर्वजों के समय से उपयोग में है। ग्रामीणों ने बताया कि राजघाट बांध से विस्थापित होने के बाद वर्ष 1999 में तहसीलदार और लेखपाल ने उन्हें मजरा जनकपुर में बसाया था। तब से लगभग 200 सहरिया आदिवासी परिवार इस मजरे में निवास कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2004 में वन विभाग की सीमा का पता चला। जब वे रास्ते की मरम्मत करके आवागमन योग्य बनाते हैं, तो वन विभाग उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर देता है, जिससे वे काफी परेशान हैं। वर्तमान में मार्ग पर कीचड़ भरा है, जिससे बच्चों, राहगीरों और वाहनों को निकलने में भारी असुविधा हो रही है। ग्रामीणों ने तत्काल राजस्व टीम और वन विभाग की टीम को मौके पर भेजकर आने-जाने वाले रास्ते को ठीक कराने की मांग की, ताकि उनके बच्चे स्कूल आ-जा सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे अनशन करने को बाध्य होंगे। ज्ञापन सौंपते समय राजपाल, संतोष, रामदेवी, सुदीप, गणेश, राम प्रसाद, राधा बाई, गुलाब रानी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
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