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मेरठ में बुधवार सुबह हुई महज 20 मिनट की तेज बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी। देखते ही देखते मुख्य सड़कें, बाजार, गलियां और पॉश कॉलोनियां पानी में डूब गईं। कई इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया, जबकि दर्जनों घरों में गंदा पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण यातायात प्रभावित रहा और स्कूल जाने वाले बच्चों व अभिभावकों को भी मुश्किलों से जूझना पड़ा। सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर बारिश शुरू होते ही लोगों ने उमस और गर्मी से राहत महसूस की, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात बिगड़ गए। शहर के नाले और नालियां उफनने लगीं और गन्दा पानी सड़कों पर फैल गया। जिन क्षेत्रों में आमतौर पर जलभराव नहीं होता, वहां भी घुटनों तक पानी जमा हो गया। लोगों को घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया और कई स्थानों पर वाहन पानी में फंस गए। पॉश कॉलोनी में भी घरों में घुसा पानी
सुभाष नगर, मोहनपुरी, बुढ़ाना गेट, शिवाजी रोड, खैरनगर, फिल्मिस्तान रोड, हंस चौक, बच्चा पार्क, जली कोठी, नगर निगम मार्केट, गांधीनगर, लालकुर्ती, मेहताब, रजबन और वेस्टर्न कचहरी रोड समेत दो दर्जन से ज्यादा इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। पॉश कॉलोनियों में भी घरों के बाहर और अंदर पानी भर गया। लोग बाल्टियों और मोटरों की मदद से घरों से पानी और गंदगी निकालते दिखाई दिए। कई स्थानों पर सीवर का गंदा पानी भी सड़कों पर बहता रहा। छुट्टी होने पर गंदे पानी से निकले बच्चे
बारिश रुकने के बाद स्कूलों की छुट्टी हुई तो अभिभावकों को छोटे-छोटे बच्चों को गोद में उठाकर गंदे पानी के बीच से निकलकर घर ले जाना पड़ा। जलभराव के कारण बाजारों में भी कारोबार प्रभावित हुआ और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बारिश के दौरान कई प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। पानी उतरा लेकिन सड़कों पर फैली गंदगी
बारिश रुकने के करीब दो घंटे बाद पानी तो उतर गया, लेकिन सड़कों पर कीचड़, कूड़ा और गंदगी की मोटी परत रह गई। इससे लोगों में नगर निगम के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नालों की नियमित सफाई नहीं होने और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। जल भराव को लेकर यह बोले लोग – महेश का कहना था कि पानी भरने के बाद बहुत परेशानी होती है। सड़क पर कहां गड्ढा है दिखाई नहीं देता। गिरने का डर बना रहता है। कुछ समय पहले नाले बनाए गए थे लेकिन वह भी ठीक नहीं बनाए गए। अगर नाले ठीक बनते तो पानी भरता ही नहीं। – अवधेश कुमार ने कहा कि नगर निगम का भ्रष्टाचार शहर में जल भराव का प्रमुख कारण है। नाले बनाकर उन्हें ढक दिया गया है। अंदर पन्नी और कूड़ा पानी रोक रहा है। हर वर्ष बारिश से पहले तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरे शहर की तस्वीर सामने आ जाती है। – राजरानी का कहना था कि थोड़ी सी बारिश में ही पानी भर जाता है। स्कूल से बच्चों को लाना मुश्किल हो जाता है। सालों से यही समस्या बनी आ रही है कोई देखने वाला नहीं है। सभासद को ऐसी समस्याओं का समाधान कराना चाहिए। – विदित वर्मा ने कहा कि गली मोहल्ले में गंदा पानी भरने के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। यहां की गलियां मुख्य नालों पर निर्भर हैं। अगर मुख्य नाले ही साफ नहीं होंगे तो यह गंदा पानी आने वाले समय में वहां तक पहुंच जाएगा, जहां पहले कभी नहीं पहुंचा। जल भराव के कारण ग्राहक नहीं आ रहे और काम धंधा ठप हो गया है।
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