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बुधवार को औरैया में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पति को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। साल 2023 में दर्ज इस मुकदमे में न्यायालय ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। वादनी ने साल 2023 में अपने पति और अन्य ससुरालियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, पुलिस जांच के दौरान पति के अलावा अन्य ससुरालियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे, जिसके कारण विवेचक ने उनका नाम पहले ही मुकदमे से हटा दिया था। विचारण के दौरान, अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता सुरेश मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की। बचाव पक्ष द्वारा की गई जिरह में, वादिनी अपने पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रही। जिरह के दौरान वादिनी ने यह स्वीकार किया कि उसने लोगों के बहकावे में आकर यह मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया कि उसके पति और अन्य ससुरालियों ने उससे कभी दहेज की मांग नहीं की थी और न ही उसे दहेज के लिए कभी प्रताड़ित किया गया। केस डायरी में शामिल मेडिकल रिपोर्ट और उसमें दर्शाई गई चोटों के संबंध में भी वादिनी अधिवक्ता सुरेश मिश्रा के सवालों में उलझ गई। अंततः उसने जिरह के दौरान यह स्वीकार किया कि उसके शरीर पर आई चोटें जमीन पर गिरने के कारण थीं, न कि पति या ससुरालियों द्वारा मारपीट करने से। न्यायालय में अंतिम बहस के दौरान, बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश मिश्रा ने पत्रावली में शामिल तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। उन्होंने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। बचाव पक्ष की दलीलों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियोजन के आरोप सिद्ध न होने पर अभियुक्त पति को दोषमुक्त करते हुए मुकदमे से बरी करने का आदेश दिया।



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