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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोंडा जिले में शिक्षकों,कर्मचारियों और छात्रों के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की है। आज बुधवार को सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत 20 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों को लाभ मिला, जबकि लगभग 3 लाख बच्चों को डीबीटी के माध्यम से ₹1200 उनके अभिभावकों के खातों में भेजे गए। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ बेसिक शिक्षा विभाग के 19,101 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 1,000 शिक्षकों व कर्मचारियों को मिला है। इन सभी 20,000 लाभार्थियों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड बनाए जाएंगे, जिससे वे और उनके परिवार ₹5 लाख तक का इलाज करवा सकेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान गोंडा जिले के लगभग तीन लाख बच्चों को डीबीटी योजना के तहत यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी खरीदने के लिए प्रत्येक छात्र के अभिभावक के खाते में ₹1200 ऑनलाइन भेजे गए। यह राशि बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में बेहतर ढंग से पढ़ने के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने में मदद करेगी। यह कार्यक्रम गोंडा मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वर्चुअल संबोधन के साथ आयोजित किया गया था। इस अवसर पर यूपी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा, जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, गोंडा सांसद प्रतिनिधि रमाशंकर, कैसरगंज सांसद प्रतिनिधि संजीव सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष इकबाल बहादुर तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के 25 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 9 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से कैशलेस चिकित्सा योजना के कार्ड वितरित किए गए।यूपी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने अध्यापकों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा यह एक बड़ी सहायता है। उन्होंने बताया कि इस योजना से शिक्षक, कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य कैशलेस चिकित्सा के तहत ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। पहले जो परिषदीय विद्यालय में बच्चे पढ़ते थे 2017 से पहले उन्हें ठीक से यूनिफॉर्म नहीं मिल पाता था कुछ नहीं हो पता था। अब सीधा उनके खातों में पैसा भेजा जा रहा है अब वह खरीद करके खुद विद्यालय पढ़ने आ सकते हैं ₹1 का कहीं भी इधर-उधर इस सरकार में नहीं हो रहा है। अपना खुद का भी करवा सकते हैं इससे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी सरकार की बहुत ही अच्छी पहल है। पहले जो परिषदीय विद्यालय में बच्चे पढ़ते थे 2017 से पहले उन्हें ठीक से यूनिफॉर्म नहीं मिल पाता था कुछ नहीं हो पता था अब सीधा उनके खातों में पैसा भेजा जा रहा है। अब वह खरीद करके खुद विद्यालय पढ़ने आ सकते हैं ₹1 का कहीं भी इधर-उधर इस सरकार में नहीं हो रहा है सीधा खाते में जा रहा है।



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