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बागपत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अवैध रूप से संचालित हो रहे 13 ईंट भट्टों का संचालन बंद करा दिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशों पर की गई है, जिसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रत्येक वर्ष पर्यावरण संरक्षण को लेकर कुछ समय के लिए ईंट भट्टों का संचालन प्रतिबंधित रहता है। संचालन अवधि में भी पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य है। क्षेत्रीय कार्यालय, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मेरठ/बागपत द्वारा किए गए निरीक्षण में कुल 16 ईंट भट्टे पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते पाए गए थे। इन भट्टों के विरुद्ध वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की संस्तुति की गई है। दोषी पाए जाने पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का पर्यावरणीय प्रतिकर लगाया जा सकता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर चलाए गए एक विशेष सर्वेक्षण अभियान में 13 ईंट भट्टे अवैध रूप से संचालित होते मिले। प्रशासन ने तत्काल उनका संचालन बंद करा दिया और उनके विरुद्ध पर्यावरणीय प्रतिकर लगाने के लिए न्याय निर्णयन अधिकारी को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में किसी भी स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल ईंट भट्टों ही नहीं, बल्कि उद्योगों, अस्पतालों, मोटर वाहनों अथवा अन्य किसी भी स्रोत से प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाकर प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान करने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के अंतर्गत जनपद के लगभग 390 ईंट भट्टों से प्रत्येक परिसर में कम से कम 100 पौधे लगाने की अपील की गई है, ताकि हरित और स्वच्छ बागपत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।



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