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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और ‘फ्रीडम फ्रॉम पॉवर्टी ट्रस्ट’ (FFPT) भारत के बीच मंगलवार की दोपहर 2 बजे एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। यह MoU यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. पूनम टंडन और ट्रस्ट के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. हेमंत कुमार दीक्षित की मौजूदगी में किया गया। इसका उद्देश्य डीडीयू के पूर्व छात्र और दुनिया भर में मशहूर सांख्यिकीविद् दिवंगत प्रो. टी. डी. द्विवेदी की याद में हर साल “डॉ. टी. डी. द्विवेदी स्वर्ण पदक (सांख्यिकी)” और “डॉ. टी. डी. द्विवेदी स्मृति व्याख्यान” (मेमोरियल लेक्चर) की शुरुआत करना है। इसके तहत यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर सांख्यिकी विषय में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले छात्र को हर साल दीक्षांत समारोह में “डॉ. टी. डी. द्विवेदी स्वर्ण पदक” दिया जाएगा। इसके साथ ही 10,000 रुपये का नकद पुरस्कार भी मिलेगा। स्मृति व्याख्यान के लिए 40 हजार की मदद मिलेगी
वहीं, हर साल होने वाले स्मृति व्याख्यान के आयोजन के लिए ट्रस्ट यूनिवर्सिटी को सालाना 40,000 रुपये तक की आर्थिक मदद देगा। इस पूरे मेडल और कार्यक्रम को हमेशा चलाने के लिए ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी को तीन लाख रुपये का फंड (कोष निधि) भी सौंप दिया है। कौन थे प्रोफेसर टी. डी. द्विवेदी?
प्रो. टीडी द्विवेदी डीडीयू के 1961 बैच के छात्र थे। 15 अक्टूबर 1937 को जन्मे और 23 दिसंबर 2008 को दुनिया से विदा हुए प्रो. त्र्यम्बकेश्वर धर द्विवेदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी खोजों के लिए जाना जाता है। उन्होंने डीडीयू से मैथ्स में एमएससी करने के बाद कनाडा और अमेरिका से सांख्यिकी में पीएचडी की। कनाडा की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी में उन्होंने ‘स्टैटिस्टिक्स ग्रुप’ बनाया और डेटा मॉडलिंग व अर्थमिति जैसे मुश्किल क्षेत्रों में बड़ा योगदान दिया। वे ‘फ्रीडम फ्रॉम पॉवर्टी फाउंडेशन’ के फाउंडर भी थे। मौजूदा समय में उनके बेटे डॉ. शिवेंद्र धर त्रिवेदी इसके कनाडा और भारत के प्रेसिडेंट हैं। छात्रों को मिलेगी आगे बढ़ने की प्रेरणा- कुलपति
इस मौके पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि डीडीयू हमेशा से अच्छी पढ़ाई और नई रिसर्च को बढ़ावा देता रहा है। हमारे गौरवशाली पूर्व छात्र की याद में शुरू हो रहा यह मेडल छात्रों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा। इस कार्यक्रम के दौरान प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. अजय सिंह, प्रो. हिमांशु पाण्डेय, प्रो. दिव्या रानी सिंह, प्रो. धनंजय कुमार और डॉ. मनीष पाण्डेय समेत कई शिक्षक व अधिकारी मौजूद रहे।



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