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शहर का चर्चित सेक्स रैकेट के मुकदमें में 23 साल बाद कोर्ट ने दो महिलाओं समेत सात लोगों को बरी कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि किसी भी पड़ोसी या अन्य व्यक्ति ने घर में सेक्स रैकेट चलने की शिकायत नहीं की थी। दोनों घरों में सेक्स रैकेट से संबंधित घटनाक्रम प्रत्यक्ष नहीं पाया गया। कोर्ट ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने पकड़ी गई महिला के बयान के आधार पर छापेमारी की थी। पुलिस अभिरक्षा में दिए गए बयान का कोई विधिक महत्व नहीं होता। नवंबर 2003 में SOG और बाबूपुरवा पुलिस ने छापेमारी की थी फजलगंज थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक 28 नवंबर 2003 को बाबूपुरवा सीओ व एसओजी पर्यवेक्षण अधिकारी शैलेश कुमार यादव कई थानों की फोर्स के साथ आरोपियों की तलाश में फजलगंज चौराहा पहुंचे, जहां सूचना मिली कि अंसल अपार्टमेंट में रहने वाली मधु अग्रवाल अपने फ्लैट पर गिरोहबंदी कर सेक्स रैकेट चला रही है। चुपके से झांकने पर देखा कि दो पुरुष व पांच महिलाएं आपस में बैठकर बात कर रही थीं। देह व्यापार की पुष्टि के लिए दरोगा अरुण कुमार सिंह और जितेंद्र सिंह को सादे कपड़ों में अंदर सौदा करने भेजा। मधु अग्रवाल से बात करने पर उसने कहा कि एक व्यक्ति के दो हजार रुपये लेगी। दरोगा ने बाहर निकलकर पूरी बात बताई। इसके बाद मधु अग्रवाल, बाईपास रोड बर्रा झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली रानी चौहान, शांति नगर उन्नाव निवासी रश्मि दीक्षित, सेक्टर नौ डीडीए कालोनी नई दिल्ली निवासी रिया उर्फ तनू सक्सेना, माडल टाउन निवासी सरदार रवींद्र सिंह, मंडी बाजार तिर्वा कन्नौज निवासी दिनेश गुप्ता को गिरफ्तार किया। इन लोगों को किया गया था गिरफ्तार मधु अग्रवाल ने बताया कि वह यह धंधा काफी समय से कर रही है। रिया ने बताया कि वह बर्रा चार निवासी ऊषा त्रिवेदी के यहां भी धंधा करने जाती है। सुष्मिता मिश्रा भी सेक्स रैकेट चलाती है। इसके बाद पुलिस ने ऊषा त्रिवेदी के घर छापा मारा, जहां से ऊषा त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी निवासी ऊषा त्रिवेदी के ड्राइवर गुड्डू, किदवई नगर निवासी ललित कुमार, बर्रा छह निवासी मोहित त्रिवेदी, बर्रा निवासी रोहित त्रिवेदी, अजीतगंज बाबूपुरवा निवासी मुकेश कुमार, शारदा नगिर निवासी पूजा, दिल्ली निवासी मनीषा, औरंगाबाद दिल्ली निवासी मोनिका, पटेल नगर दिल्ली निवासी प्रीति और अहिरवां निवासी वंदना को गिरफ्तार किया। ऊषा ने बताया कि उसके दोनों बेटे मोहित व रोहित भी धंधे में मदद करते हैं। मुकदमा अपर जिला जज मुकेश कुमार सिंह की कोर्ट में चल रहा था। मधु अग्रवाल, मधु चौहान, रश्मि दीक्षित, रिया उर्फ तनू, ऊषा त्रिवेदी, मोहित, रोहित, गुड्डू, पूजा, रानी चौहान, प्रीती, वंदना के खिलाफ आरोप तय हुए। बाद में मंजू चौहान, रानी चौहान, प्रीती कौर, वंदना, मनीषा मोनिका की फाइल अलग कर दी गई थी। अभियोजन ने पेश किए थे 8 गवाह अभियोजन की तरफ से 8 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने गुरुवार को मधु अग्रवाल, दिनेश कुमार गुप्ता, गुड्डू, रोहित, ललित कुमार, मुकेश कुमार और पूजा भदौरिया को दोष मुक्त करार दिया। कोर्ट ने कहा कि मधु अग्रवाल के यहां से पकड़ी गई रिया उर्फ तनू के बयान के आधार पर ऊषा त्रिवेदी के घर छापेमारी की गई। पुलिस अभिरक्षा में दिए गए बयान का कोई विधिक महत्व नहीं होता है। मधु और ऊषा से शेष आरोपियों के संबंध जानने के लिए दोनों के घरों पर लगे टेलीफोन के काल डिटेल नहीं निकलवाए। इसी मामले में आरोपी रवींद्र सिंह को दोष मुक्त करार किया जा चुका है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अहमद अली ने बताया कि लड़कियों ने बयान में कई पुलिस अफसरों के नाम लिए थे। इसमें एक चर्चित इंसपेक्टर, उनके अधिवक्ता भाई, सीओ और एसपी शामिल थे। एडीजीसी संजय झा ने कहा कि फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।



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