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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने फंगस की एक नई जीनस की खोज की है। इस नई फंगस का नाम ‘हायलोकमलोमाइसीज़’ रखा गया है। यह खोज पौधों में बीमारी फैलाने वाले फंगस के अध्ययन में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह खोज BHU के बॉटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में की गई। शोध टीम ने उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में अमलतास (Cassia fistula) के पौधों की पत्तियों पर लगे धब्बों की जांच के दौरान इस फंगस को खोजा। हायलोकमलोमाइसीज़ दिया गया नाम वैज्ञानिकों ने कई आधुनिक तकनीकों की मदद से इस फंगस का अध्ययन किया। जांच में पता चला कि यह पहले से ज्ञात फंगस से अलग है और इसका अपना अलग विकास क्रम है। इसी आधार पर इसे नई जीनस के रूप में मान्यता दी गई।‘हायलोकमलोमाइसीज़’ नाम में ‘Hyalo’ शब्द का अर्थ पारदर्शी होता है, जो इस फंगस की विशेष संरचना को दर्शाता है। इसके दूसरे हिस्से ‘kamalomyces’ को प्रसिद्ध माइकोलॉजिस्ट प्रोफेसर कमल के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने भारत की फंगल जैव-विविधता पर महत्वपूर्ण काम किया है। ‘माइकोलॉजिकल प्रोग्रेस’ में शोध को किया गया प्रकाशित यह शोध 10 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल ‘माइकोलॉजिकल प्रोग्रेस’ में प्रकाशित हुआ है। फंगस के नमूने को भविष्य के अध्ययन के लिए नेशनल फंगल कल्चर कलेक्शन ऑफ इंडिया (NFCCI), पुणे में सुरक्षित रखा गया है।शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत में फंगस की हजारों प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें से कई अभी खोजी जानी बाकी हैं। ऐसी खोजें नई दवाओं, बेहतर कृषि तकनीकों और जैव-प्रौद्योगिकी के विकास में मददगार साबित हो सकती हैं।
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