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लखीमपुर खीरी में परीक्षा में किसी सवाल का जवाब गलत हो जाए तो तनाव लेने के बजाय यह जिद होनी चाहिए कि गलती आखिर हुई कहां। राजकीय इंटर कॉलेज में गुरुवार को विद्यार्थियों से संवाद के दौरान जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने बच्चों को सफलता का यही मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि गलत उत्तर असफलता का प्रमाण नहीं, बल्कि अपनी कमी पहचानने का मौका है। जरूरत पड़े तो एक सवाल दस बार हल करें, लेकिन गलती का कारण समझे बिना आगे न बढ़ें। सवाल समझना ही आधा समाधान डीएम ने कहा कि किसी भी प्रश्न को हल करने से पहले उसे ठीक से समझना जरूरी है। कई बार विद्यार्थी से पूछा कुछ जाता है और वह जवाब कुछ और लिख देता है। इसलिए परीक्षा में प्रश्न पहली बार समझ न आए तो उसे दो-तीन बार पढ़ना चाहिए। सवाल की सही समझ बन गई तो उसका आधा समाधान वहीं हो जाता है। उन्होंने कहा कि कठिन सवाल से घबराने के बजाय उसे दोबारा हल करना चाहिए। लगातार अभ्यास से समझ मजबूत होती है और अगली बार वही गलती दोहराने की संभावना कम होती है। कैलकुलेशन में होने वाली छोटी गलतियों को भी नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता है। मंच का डर भी अभ्यास से होगा खत्म एक विद्यार्थी ने मंच पर बोलने में डर लगने की बात कही। इस पर डीएम ने कहा कि झिझक केवल विद्यार्थियों को नहीं होती, बड़े लोगों को भी कभी-कभी इसका सामना करना पड़ता है। सामने वाले को खुद से बहुत बड़ा मानने पर डर पैदा होता है। इसका सबसे बेहतर उपाय लगातार बोलना और प्रयास करना है। जितनी बार मंच पर जाएंगे, उतना ही आत्मविश्वास बढ़ेगा। लक्ष्य तय किए बिना भटकेगा मन पढ़ाई में एकाग्रता नहीं बनने के सवाल पर डीएम ने कहा कि जब लक्ष्य स्पष्ट नहीं होता तो मन बार-बार दूसरी चीजों की ओर भटकता है। इसलिए विद्यार्थियों को पहले अपना लक्ष्य तय करना चाहिए और फिर उसी दिशा में लगातार मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करना या जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना लक्ष्य हो सकता है, लेकिन लक्ष्य के साथ शॉर्टकट छोड़ना जरूरी है। कठिन विषय से भागने के बजाय उसका बार-बार अभ्यास करना चाहिए। शिक्षक से सवाल पूछने में न करें संकोच डीएम ने विद्यार्थियों से कहा कि कोई सवाल समझ में न आए तो शिक्षक से पूछने में संकोच न करें। जरूरत पड़ने पर दूसरे उपलब्ध माध्यमों की भी मदद ली जा सकती है, लेकिन प्रयास बंद नहीं होना चाहिए। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, “संघर्ष का मैदान छोड़कर मत आओ।” कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पढ़ाई, आत्मविश्वास और परीक्षा से जुड़े सवाल पूछे। डीएम ने उनके सवालों का जवाब देते हुए असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखने, नियमित अभ्यास करने और लक्ष्य पर टिके रहने की सलाह दी। कार्यक्रम में डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र, प्रधानाचार्य डॉ. जगत प्रकाश सिंह समेत विद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे।
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