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यूपी कांग्रेस के नए प्रभारी राजेंद्र पाल ने कमान संभालते ही बयान दिया था कि गठबंधन 50 फीसदी यानी बराबरी की सीटों पर ही किया जाएगा। मंगलवार दोपहर 3 बजे कानपुर में सपा और कांग्रेस के नेताओं ने बात रखी। शहर शहर में 10 विधानसभा सीट में से 3 पर सपा का कब्जा है, 2022 विधानसभा चुनाव में सपा- कांग्रेस गठबंधन में सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन कानपुर में तीन सीटों पर गठबंधन होने या न होने का क्या असर पडेगा। भाजपा ने कहा कि गठबंधन हो या न हो, जीत भाजपा की ही होगी, कानपुर से दैनिक भास्कर एप ने की रिपोर्ट पढ़िए। कांग्रेस बोली- तीनों सीटों पर हमारी भी मजबूत भूमिका रही
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पूरे प्रदेश में मजबूत है। कानपुर शहर में 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें आर्यनगर, सीसामऊ और कैंट सीट पर 2022 में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में जीत दर्ज की थी। उन्होंने कहा कि सीसामऊ उपचुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत की थी। उसी का नतीजा था कि सपा करीब 6 हजार वोटों से चुनाव जीत सकी।
उन्होंने कहा कि शहर कांग्रेस कमेटी ने सभी सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नाम भी भेज दिए हैं। अगर गठबंधन होता है तो शहर उत्तर और दक्षिण समेत बराबरी के आधार पर सीटें मिलनी चाहिए। लोकसभा के वोटों का दिया हवाला
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को कानपुर में 4 लाख 22 हजार वोट मिले थे।
उन्होंने दावा किया कि सीसामऊ में विधानसभा चुनाव सपा 6 हजार वोट से जीती थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वहां 27 हजार ज्यादा वोट मिले। कैंट में विधानसभा चुनाव 16 हजार वोट से जीता गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 46 हजार ज्यादा वोट मिले। वहीं आर्यनगर में भी कांग्रेस को विधानसभा चुनाव की तुलना में लोकसभा चुनाव में करीब 11 हजार ज्यादा वोट मिले। इससे साफ है कि शहर में कांग्रेस की मजबूत हुई है। सपा बोली- जिताऊ सीटों पर होगा फैसला
कैंट से सपा विधायक हसन रूमी ने कहा कि जब कोई नया थानेदार, इंस्पेक्टर या एसएसपी आता है तो वह अपनी कार्यशैली और दबदबा दिखाने की कोशिश करता है। नए प्रभारी बने हैं, इसलिए उन्होंने अपनी बात रखी है। रूमी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि जहां कांग्रेस की जीत की संभावना होगी, वहां सीट दी जाएगी। गठबंधन में सीटों का अंतिम फैसला दोनों दलों का हाईकमान करेगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 403 सीटों पर तैयारी कर रही है और कांग्रेस को भी 403 सीटों पर तैयारी करनी चाहिए। बाद में अगर गठबंधन होता है तो सीटों का बंटवारा तय हो जाएगा। हमारा लक्ष्य भाजपा को हराना है। बीजेपी बोली- सीटों की नहीं, टिकटों की बंदरबांट चल रही
भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने कहा कि पिछली बार भी सपा और कांग्रेस साथ चुनाव लड़े थे। हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ चुनाव लड़ी, लेकिन नतीजे सबके सामने हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में सीटों को लेकर सिद्धांत नहीं, बल्कि टिकटों की बंदरबांट चल रही है। आधी सीटें मांगना दोनों दलों का अंदरूनी मामला है।
प्रकाश पाल ने कहा कि जनता ने मन बना लिया है कि 2027 में भी उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने विपक्ष के कार्यकर्ताओं से कहा कि टिकट लेकर पैसा बर्बाद करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गठबंधन हो या न हो, जीत भाजपा की ही होगी।



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