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उवैस चौधरी | इटावा2 मिनट पहले

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इटावा स्थित भदावरी भैंस एवं जमुनापारी बकरी प्रजनन केंद्र में देश की सबसे उत्कृष्ट नस्ल मानी जाने वाली जमुनापारी बकरियों पर रहस्यमयी बीमारी का कहर देखने को मिला है। पिछले एक महीने के दौरान केंद्र में 37 बकरे, बकरियां और उनके बच्चों की मौत हो चुकी है।

हैरानी की बात यह है कि मृत पशुओं के सैंपल देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों मथुरा अनुसंधान केंद्र और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली भेजे गए, लेकिन जांच रिपोर्ट में भी बीमारी का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। इससे पशुपालन विभाग और वैज्ञानिकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

जमुनापारी नस्ल की बकरी इटावा के चंबल क्षेत्र की पहचान मानी जाती है।

यह नस्ल अपने उच्च गुणवत्ता वाले दूध और मांस के कारण देश ही नहीं बल्कि वियतनाम, जापान, बांग्लादेश सहित कई देशों में भी बेहद मांग में रहती है। इसी नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए चकरनगर में भदावरी भैंस एवं जमुनापारी बकरी प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है, जहां सरकार हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करती है।

संयुक्त निदेशक डॉ. डी.के. मिश्रा ने बताया कि मार्च 2026 में औरैया में आयोजित पशु मेले से 50 बकरियां और 5 बकरे खरीदे गए थे। इसके अलावा इटावा में लगे मेले से भी 50 बकरियां और 5 बकरे खरीदे गए। इस तरह कुल 110 जमुनापारी बकरी-बकरे प्रजनन केंद्र लाए गए।

21 दिन तक क्वारंटीन में रखा

इनकी खरीद 60 हजार से 75 हजार रुपये प्रति पशु की दर से की गई थी। केंद्र में लाने के बाद सभी पशुओं को 21 दिन तक क्वारंटीन में रखा गया और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही मुख्य झुंड में शामिल किया गया। डॉ. मिश्रा के अनुसार जून महीने में अचानक कुछ बकरियों में सांस लेने में तकलीफ, तेज खांसी और फेफड़ों से संबंधित गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।

इसके बाद प्रतिदिन पशुओं की मौत का सिलसिला शुरू हो गया और एक महीने में 37 बकरे, बकरियां तथा उनके बच्चे दम तोड़ चुके हैं।

मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें माइकोप्लाज्मा सहित कुछ अन्य बीमारियों की आशंका जताई गई, लेकिन लैब जांच में किसी भी वायरस या संक्रमण की पुष्टि नहीं हो सकी।

संक्रामक बीमारी की पुष्टि नहीं

इसलिए बीमारी का वास्तविक कारण अब भी अज्ञात बना हुआ है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मृत और बीमार पशुओं के नमूने मथुरा अनुसंधान केंद्र और आईवीआरआई बरेली भेजे गए, लेकिन दोनों संस्थानों की रिपोर्ट में भी किसी विशेष वायरस या संक्रामक बीमारी की पुष्टि नहीं हुई।

पशुपालन विभाग की विशेषज्ञ टीमें लगातार जांच कर रही हैं, फिर भी अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है। वर्तमान में प्रजनन केंद्र में 114 बकरे-बकरियां और उनके बच्चे मौजूद हैं। इनमें से पांच बकरियां अभी भी बीमार हैं, जिन्हें अलग बाड़े में आइसोलेट कर उपचार दिया जा रहा है ताकि संक्रमण फैलने की आशंका न रहे।

पूरे केंद्र की निगरानी बढ़ा दी गई है और पशुओं के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

संयुक्त निदेशक डॉ. डी.के. मिश्रा ने बताया कि मई और जून के दौरान अत्यधिक गर्मी भी एक संभावित कारण हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि जमुनापारी नस्ल प्राकृतिक रूप से चंबल क्षेत्र के बीहड़ों में ऊंचे पेड़-पौधों की पत्तियां खाकर विकसित होती है, जबकि प्रजनन केंद्र में उन्हें नियंत्रित आहार दिया जाता है। इस कारण भी वैज्ञानिक सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जमुनापारी नस्ल की बकरियां देश-विदेश में ब्रीडिंग के लिए भी भेजी जाती हैं।

रहस्यमयी बीमारी से बड़ी संख्या

इस केंद्र से तैयार उच्च नस्ल के बकरे और बकरियां कई राज्यों के साथ विदेशों तक पहुंचते हैं। ऐसे में पहली बार इस तरह की रहस्यमयी बीमारी से बड़ी संख्या में हुई मौतों ने पशुपालन विभाग के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। जब तक बीमारी का वास्तविक कारण सामने नहीं आता, तब तक इस दुर्लभ नस्ल की सुरक्षा और संरक्षण सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।



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