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गाजीपुर की जमानियां नगर पालिका परिषद में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए एमएलसी विशाल सिंह चंचल के नाम और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर फर्जी लेटर तैयार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के जरिए पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना के तहत 408.68 लाख यानी करीब 4.08 करोड़ रुपए के अनुदान का प्रस्ताव आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। मामले में एमएलसी के प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप पाठक की तहरीर पर जमानियां कोतवाली पुलिस ने नगर पालिका अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें सरकारी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है। 10 जून की तारीख वाले पत्रों पर कथित फर्जी हस्ताक्षर एमएलसी प्रतिनिधि की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक, कथित तौर पर तैयार किए गए दो पत्रों पर 45358 और 9484 क्रमांक दर्ज थे। इन पत्रों पर 10 जून 2026 की तारीख अंकित थी और आरोप है कि उन पर एमएलसी विशाल सिंह चंचल के नाम से कूटरचित हस्ताक्षर किए गए। इन पत्रों के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना के तहत 408.68 लाख रुपए के सरकारी अनुदान की कार्रवाई आगे बढ़ाने का प्रयास किए जाने का आरोप है। मुख्य मार्गों पर लाइट लगाने का था प्रस्ताव कथित प्रस्ताव के अनुसार, अनुदान की रकम से जमानियां नगर क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को मजबूत किया जाना था। इसके लिए मुख्य मार्गों पर 7 मीटर और 9 मीटर ऊंचे ऑक्टागोनल पोल और लाइटें लगाए जाने की योजना बताई गई। आरोप है कि इसी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए एमएलसी के नाम और हस्ताक्षर वाले पत्रों का इस्तेमाल किया गया। कथित फर्जी दस्तावेजों से संबंधित पत्र जब एमएलसी कार्यालय पहुंचे तो वहां उनकी जांच कराई गई। कार्यालय की ओर से पत्र को फर्जी बताया गया। इसके बाद नगर विकास मंत्री को मामले की जानकारी देते हुए प्रस्तावित अनुदान की कार्रवाई रोकने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद एमएलसी प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप पाठक ने जमानियां पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। फर्जी लेटर से लेकर पूरी प्रक्रिया की जांच होगी एसपी ग्रामीण अतुल सोनकर ने बताया कि 7 अगस्त को प्राप्त तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस की जांच केवल फर्जी लेटर पैड और कथित हस्ताक्षर तक सीमित नहीं रहेगी। शासन को भेजे गए दस्तावेज, प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया, पत्र किस स्तर पर तैयार हुआ और उसे किन-किन माध्यमों से आगे भेजा गया, इसकी भी जांच की जाएगी। पुलिस खंगालेगी दस्तावेजों की पूरी कड़ी एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी पत्र कहां तैयार किए गए, उन्हें किसने तैयार किया, किस माध्यम से शासन तक भेजा गया और सरकारी अनुदान के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस संबंधित दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड भी जुटा रही है। जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल करीब 4.08 करोड़ रुपए के सरकारी अनुदान से जुड़े प्रस्ताव में एमएलसी के नाम और कथित हस्ताक्षर के इस्तेमाल के आरोप ने जमानियां नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित कूटरचित दस्तावेज किसने तैयार किए और सरकारी प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किस स्तर तक किया गया।
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