नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं।
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। यानी SIR पूरा होने के बाद फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी।
हालांकि जिन राज्यों में SIR जारी है, वहां फॉर्म 6 में यह घोषणा अब भी दिख रही है। यह बदलाव मंगलवार देर रात ECINET पोर्टल पर किया गया। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को इसका ऐलान किया था।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस पर आपत्ति जताई थी। फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए होता है।

फॉर्म 6 से घोषणा-पत्र हटाने के मायने
1. SIR हो चुके राज्यों में फॉर्म 6 से घोषणा-पत्र हटाने के मायने: SIR के दौरान मतदाता सूची की जांच और पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी पहले ही जुटाई जा चुकी है। इसलिए SIR पूरा होने के बाद नया वोटर बनने वाले व्यक्ति से यह अलग से पूछना कि उसका या उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था या नहीं, जरूरी नहीं माना गया।
2. SIR प्रक्रिया जारी वाले राज्यों में घोषणा-पत्र बनाए रखने के मायने: वहां पिछले SIR के रिकॉर्ड से नए वोटर या उसके परिवार का संबंध पता करने के लिए यह घोषणा ली जा रही है। यानी SIR शुरू होने तक यह जानकारी वोटर लिस्ट की जांच और पुराने रिकॉर्ड से मिलान में काम आ सकती है। SIR के बाद यही घोषणा हटती है तो उस राज्य में भी नए वोटर को यह अतिरिक्त जानकारी देने की जरूरत नहीं रहेगी और प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
रिपोर्ट- 2 चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई
- द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी जानकारी जोड़ने पर आपत्ति जताई थी।
- उनका कहना था कि नियमों में बदलाव किए बिना वैधानिक फॉर्म 6 में नया हिस्सा जोड़ दिया गया।
- विवेक जोशी ने कहा कि फॉर्म 6 नियमों के तहत तय फॉर्म है, इसलिए इसमें बदलाव के लिए पहले नियमों में संशोधन जरूरी है।
- वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े गए हिस्से को “अनधिकृत और अवैध” बताते हुए उसे हटाने की बात कही थी।
SIR प्रक्रिया के बारे में जानें…

10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR
SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।
पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।
——————————
ये खबर भी पढ़ें…
रिपोर्ट- SIR पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई:आयोग बोला- यह सामान्य प्रक्रिया; राहुल ने कहा- वोट चोरी में शामिल, तो नहीं बख्शेंगे

चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों में मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
