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नई दिल्ली5 मिनट पहले
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कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। पार्टी ने कहा कि अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे।
पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़ा गद्दार हैं। उन्होंने SIR के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए। लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।
दीपके ने कहा- लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं।
दरअसल, बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की 4 बड़ी बातें
1. 2024 के नतीजों का हवाला देकर BJP पर सवाल
दीपके ने कहा- 2024 के चुनाव में BJP बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद वह 240 सीटों पर आ गई। इसके बाद उन्हें लगा कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मजबूत हो रही हैं।
2. क्षेत्रीय नेताओं को एक-एक कर हराने का आरोप
दीपके के मुताबिक, चाहे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, NCP, एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी, इन सभी मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके हराया गया। यह महज संयोग नहीं हो सकता। इसमें एक पैटर्न दिखाई देता है। ये सभी 2024 में एक साथ आए थे और उन्होंने मिलकर प्रचार किया था। फिर इन्हें एक-एक करके कैसे खत्म किया गया?
3. ममता, स्टालिन और केजरीवाल की सीटों पर वोट डिलीट होने का दावा
दीपके ने कहा- पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से 50 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 15 हजार वोटों से हार गईं। एमके स्टालिन की सीट से 1 लाख वोट डिलीट किए गए और वह करीब 45 हजार वोटों से हार गए। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से 40 हजार वोट डिलीट किए गए और वह करीब 4 से 5 हजार वोटों से हार गए।
4. विपक्ष को खत्म करने की कोशिश का सवाल
CJP फाउंडर ने कहा- क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था? हमें विपक्ष या किसी खास पार्टी से कोई विशेष लगाव नहीं है। लेकिन अगर लोकतंत्र में पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दिया जाए, तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है?

रिपोर्ट में दावा- चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां ज्ञानेश कुमार को भी भेजीं
चुनाव आयुक्तों में मतभेद का खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। यह रिपोर्ट 23 सितंबर को पब्लिश की गई। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।
आयोग के फैसलों पर 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार लिखित आपत्ति जताई गईं। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं। कुछ आपत्तियां उन उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गईं, जो संबंधित काम की निगरानी कर रहे थे।
यह विवाद बिहार से जून 2025 में शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच सामने आया है। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

रिपोर्ट के दावे और उस पर चुनाव आयोग का जवाब
1. 14 आपत्तियों पर रिपोर्ट और EC की सफाई
दावा: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-व्यवस्था सामान्य और लगातार चलने वाली प्रक्रिया हैं। इनका मकसद पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है। आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार हुए हैं।
2. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने पर सवाल
दावा: दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया से भी जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
EC का जवाब: आयोग ने कहा कि वोटरों के रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत करते हैं।
3. वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण पर सवाल
दावा: संधू और जोशी ने वोटर डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए। जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट का सुझाव दिया था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल लागू हैं।
4. नए वोटरों से जुड़े कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताने का मामला
दावा: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों से जुड़े कुछ कदमों को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया था।
EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप हुए हैं। आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट स्तर पर उठाए गए ऑपरेशनल सवाल और सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
5. फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति
दावा: दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की।
EC का जवाब: आयोग की प्रेस रिलीज में फॉर्म-6 का जिक्र नहीं है।
6. गोवा में 97 वोटरों का मामला
दावा: गोवा के एक मामले में 97 ऐसे वोटर, जिन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने पात्र माना था, सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण अंतिम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ सके। रिपोर्ट में इसे डेटा सिस्टम के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंता के उदाहरण के तौर पर बताया गया।
EC का जवाब: चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज में गोवा के इन 97 वोटरों के मामले पर अलग से कोई जवाब नहीं दिया गया।
