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3 मिनट पहले

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भाजपा में पार्टी पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और संगठन मंत्रियों की नियुक्ति के बाद अब संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के नामों की घोषणा होनी है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था संसदीय बोर्ड के गठन की प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी घोषणा पितृ पक्ष के बाद अक्टूबर में कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में आधे सदस्यों को बदला जा सकता है।

बीएस येदियुरप्पा और डॉ. सत्यनारायण जटिया को हटाया जा सकता है। इन्हीं जाति, वर्ग और क्षेत्रीय समीकरणों में फिट नेताओं को जगह दी जा सकती है। येदियुरप्पा और जटिया को बोर्ड से हटाने के पीछे उनकी अधिक उम्र होने की दलील दी जा रही है।

एक महामंत्री और महिला नेता को संसदीय बोर्ड में मिल सकती है जगह

एक महामंत्री को भी स्थान दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। पार्टी में विनोद तावड़े और सुनील बंसल सबसे वरिष्ठ महामंत्री या किसी अन्य महामंत्री को लिया जा सकता है। वहीं, लंबे समय बाद संसदीय बोर्ड में मुख्यमंत्री को भी सर्वोच्च संस्था में स्थान दिया जा सकता है।

वर्तमान में पार्टी 21 राज्यों में सत्ता में है। नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहते अलग-अलग समय पर संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे हैं। पहले संसदीय बोर्ड के सदस्य रहे नेता और एक महिला नेत्री को भी बोर्ड में स्थान दिया जाएगा।

भाजपा की संसदीय बोर्ड क्या करती है?

बीजेपी की संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्थाओं में से एक है। पार्टी के संविधान के मुताबिक यह संसदीय और विधायक दल की गतिविधियों की निगरानी करती है और संगठन के कामकाज को दिशा देती है।

मुख्यमंत्री का चेहरा तय करना

विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसे मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाएगी, इस पर बोर्ड फैसला कर सकता है। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुनने में भी इसकी भूमिका होती है।

प्रधानमंत्री पद के लिए नाम की सिफारिश

पार्टी के संविधान के तहत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पदों के लिए नाम की सिफारिश करने का अधिकार बोर्ड के पास है।

चुनाव में उम्मीदवारों पर भूमिका

संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के भी सदस्य होते हैं। यह समिति लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए BJP के उम्मीदवारों का अंतिम चयन करती है।

सरकार बनाने में मार्गदर्शन

चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलने पर सरकार के गठन को लेकर बोर्ड मार्गदर्शन देता है।

पार्टी की नीतियों पर फैसले

ऐसी नीति या नीति में बदलाव, जिसे पार्टी ने पहले औपचारिक रूप से नहीं अपनाया है, उस पर बोर्ड चर्चा और फैसला कर सकता है।

संगठन पर निगरानी

राष्ट्रीय कार्यकारिणी के नीचे आने वाली पार्टी की संगठनात्मक इकाइयों को बोर्ड दिशा-निर्देश दे सकता है।

अनुशासन से जुड़े मामलों में कार्रवाई

पार्टी के सांसदों, विधायकों या राज्य संगठन के पदाधिकारियों के अनुशासन उल्लंघन को बोर्ड देख सकता है और जरूरी कार्रवाई कर सकता है।

गठबंधन जैसे बड़े राजनीतिक फैसले

मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड को राजनीतिक गठबंधनों पर फैसला लेने का अधिकार भी है।

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