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गुजरात के अहमदाबाद में नकली ब्लड प्रेशर की दवा के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग की संयुक्त कार्रवाई में करीब 1200 स्ट्रिप नकली NICARDIA RETARD 10 बरामद की गई हैं। जांच में सामने आया कि करीब चार महीने में 1500 स्ट्रिप पहले ही बेची जा चुकी हैं। एक स्ट्रिप में 10 टैबलेट होने से करीब 15 हजार नकली गोलियां मरीजों तक पहुंचने की आशंका है। इस मामले में अहमदाबाद के एक मेडिकल कारोबारी समेत लखनऊ के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को कोर्ट ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।
असली कंपनी के नाम और बैच नंबर पर बनाई नकली दवा मामला तब सामने आया जब जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने 19 अगस्त को गुजरात फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन में शिकायत की। कंपनी ने बताया कि उसकी ब्लड प्रेशर की दवा NICARDIA RETARD 10 की नकली कॉपी बाजार में बेची जा रही है। नकली दवा पर वही नाम, लेबल और बैच नंबर ACG25007 इस्तेमाल किया गया था, जो असली दवा पर दर्ज था। इसकी मैन्युफैक्चरिंग जून 2025 और एक्सपायरी मई 2028 लिखी गई थी। पैकेजिंग इस तरह तैयार की गई थी कि मरीज और मेडिकल स्टोर संचालक के लिए असली-नकली की पहचान करना मुश्किल हो। लखनऊ की मेडिकल एजेंसी से गुजरात पहुंची सप्लाई जांच में नकली दवा की सप्लाई का कनेक्शन लखनऊ से सामने आया। पुलिस के मुताबिक अहमदाबाद के पालड़ी स्थित पार्श्व मेडिकल एजेंसी को यह स्टॉक लखनऊ की सेना मेडिकल एजेंसी से मिला था। इसके बाद गुजरात के अलग-अलग मेडिकल स्टोर तक दवा पहुंचाई गई। कच्छ में मिली दवा की सप्लाई का लिंक जयपुर की एवीआर मेडिकोज से भी सामने आया है। यानी नेटवर्क की कड़ियां उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान तक जुड़ी मिली हैं। 3600 स्ट्रिप की खेप, अहमदाबाद भेजी गई थीं 2700 पुलिस की जांच के अनुसार करीब 3600 स्ट्रिप की एक खेप तैयार हुई थी। इसमें से 2700 स्ट्रिप अहमदाबाद और 900 स्ट्रिप मैसूर भेजी गई थीं। अहमदाबाद पहुंची 2700 स्ट्रिप में से 1200 बरामद कर ली गईं, जबकि 1500 स्ट्रिप पहले ही बाजार में खप चुकी थीं। पुलिस को आशंका है कि यह दवा अहमदाबाद के अलावा सूरत, भावनगर, नडियाद और भुज तक भी पहुंची। गुजरात में जांच के दौरान 30 से ज्यादा मेडिकल स्टोर और एजेंसियों की जांच की जा चुकी है। 18 प्रतिशत कमीशन के लालच में खरीदने का आरोप पुलिस के मुताबिक अहमदाबाद के मेडिकल कारोबारी दर्शील संघवी ने कथित तौर पर ज्यादा कमीशन के लालच में नकली दवा खरीदी और इसे आगे सब-डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पहुंचाया। लखनऊ निवासी देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी पर कम कीमत में नकली दवा खरीदकर गुजरात में सप्लाई कराने का आरोप है। दोनों पहले जून 2026 में पुणे में नकली दवा के एक अन्य मामले में पकड़े जा चुके हैं। रस्तोगी पर 2022 में जीएसटी एक्ट से जुड़ा मामला भी दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। लखनऊ और जयपुर में भी पहुंची क्राइम ब्रांच की टीमें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने मामले में केस दर्ज कर चार टीमें अलग-अलग राज्यों में भेजी हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि नकली दवा बनाई और पैक कहां गई, असली कंपनी के नाम की पैकेजिंग किसने तैयार की और नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस ने मेडिकल स्टोर, एजेंसी, अस्पताल और मरीजों से अपील की है कि अगर उनके पास इस बैच की संदिग्ध दवा पहुंची है तो क्राइम ब्रांच को इसकी जानकारी दें।
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