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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही 13 एआरटीओ पर भारी पड़ी है। तय लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम वाहनों पर कार्रवाई करने के मामले में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने एनसीआर के अलग-अलग जिलों में तैनात 13 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग के निर्देशों के बावजूद पुराने वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विभाग की समीक्षा में इन जिलों में कार्रवाई की प्रगति बेहद कम और असंतोषजनक मिली। रोज 500 पुराने वाहन पकड़ने का था लक्ष्य परिवहन विभाग के मुताबिक, 13 मार्च 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की बैठक में एनसीआर में पुराने वाहनों को सड़क से हटाने और उन्हें अधिकृत स्क्रैप सेंटर भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद एनसीआर के हर जिले में रोजाना करीब 500 पुराने वाहनों को पकड़ने का लक्ष्य दिया गया। इस अभियान में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई की जानी थी। ऐसे वाहनों को पकड़कर अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र (आरवीएसएफ) भेजने के निर्देश थे। समीक्षा में सिर्फ 666 वाहन पकड़े गए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा में सामने आया कि एनसीआर के जिलों में अब तक केवल 666 वाहनों को ही पकड़ा गया। यह संख्या तय लक्ष्य की तुलना में काफी कम थी। कार्रवाई की धीमी रफ्तार को देखते हुए परिवहन आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी। इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि पाने वालों में मेरठ के सुधांशु रंजन, बागपत के विपिन कुमार, गाजियाबाद के अमित राजन राय, अंकिता शुक्ला, आकांक्षा सिंह पटेल और विनीत कुमार मिश्र शामिल हैं। इसके अलावा बुलंदशहर की नीतू शर्मा, गौतमबुद्धनगर के अभिषेक कनौजिया, उदित नारायण और नंद कुमार, हापुड़ के रमेश कुमार चौबे, मुजफ्फरनगर के अजय मिश्र और शामली के प्रवेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
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