Sorting by

×




सावन के अंतिम सोमवार को काशी विश्वनाथ का रुद्राक्ष श्रृंगार किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। सावन के चारों सोमवार को बाबा विश्वनाथ के अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किए गए। वहीं, अंतिम सोमवार को बाबा की आभा देखते ही बन रही थी। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भोलेनाथ के अद्भुत स्वरूप का चल प्रतिमा के रूप में दर्शन हुआ। बाबा विश्वनाथ के साथ माता पार्वती भी गर्भगृह में विराजित हुईं। पूरे मंदिर परिसर में की गई भव्य रुद्राक्ष सजावट देखते ही बन रही थी। बाबा के रुद्राक्ष श्रृंगार की तैयारियां सोमवार सुबह से शुरू हो गई थीं। करीब आठ से दस घंटे में चल प्रतिमा को रुद्राक्ष से सजाकर तैयार किया गया। शाम को बाबा की चल प्रतिमा को गर्भगृह में विराजित किया गया। सभी श्रृंगारों में इसे सबसे कठिन और खास माना जाता है। बाबा की पालकी सजाने में करीब डेढ़ लाख रुद्राक्ष के दानों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पूरे मंदिर परिसर को भी रुद्राक्ष के दानों और मालाओं से सजाया गया था। अंतिम सोमवार को शाम तक करीब 5 लाख 60 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। वीडियो देखने के लिए ऊपर तस्वीर पर क्लिक करे….



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *