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सुल्तानपुर शहर के खैराबाद स्थित इमामबाड़ा अबूतालिब में ईद-ए जहरा और इमाम-ए जमाना की ताजपोशी के अवसर पर एक महफिल का आयोजन किया गया। जो रविवार रात करीब 11:15 पर समाप्त हुई। इस दौरान शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। महफिल की शुरुआत मास्टर रफअत हुसैन ने तिलावत से की, जिसका संचालन अधिवक्ता अली जाफरी ने किया। कार्यक्रम में शफाअत हुसैन, आफताब हुसैन, सादिक इमाम, यासिर हुसैन, जाहिद इमाम, मासूम अली, अब्बास, शेर अली और नजर सुल्तानपुरी सहित कई शायरों ने अपने शेर प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना ने बताया कि यह दिन दोहरी ईद का महत्व रखता है। एक ओर ईद-ए जहरा का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इमाम-ए जमाना की ताजपोशी भी है। मौलाना ने ईद-ए जहरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्बला से लौटने के बाद इसी दिन सहाबिए इमाम जनाबे मुख्तारे सकाफी ने हुरमुला को कत्ल किया था। हुरमुला यजीदी फौज का वह सिपाही था जिसने हजरत इमाम-ए हुसैन के छह महीने के बेटे हजरत अली असगर को शहीद किया था। जब मदीने में इमाम-ए सज्जाद को यह खबर मिली तो वे मुस्कुराए थे। मौलाना ने इमाम-ए जमाना की ताजपोशी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 8 रबीउल अव्वल को इमाम-ए हसन असकरी की शहादत हुई थी, जिसके बाद 9 रबीउल अव्वल को इमामत हजरत इमाम-ए मेहदी के हाथों में आई। आज भी वे गैब (पर्दे) में रहते हुए खुदा के हुक्म से पूरी कायनात का संचालन कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. जफर, अजादार हुसैन, हसन अब्बास, आसिम सज्जाद, आफताब आलम और जहीर हुसैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद नजीर मुन्ने ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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