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लखनऊ बेंच ने अल्पसंख्यक आयोग में रिक्त पदों पर नामांकन/नियुक्ति में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि आयोग में पद 12 जून 2024 से खाली हैं और इस मामले में डेढ़ साल से अधिक समय से सुनवाई चल रही है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने मंगलवार को शम्स तबरेज द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। पिछली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को हुई थी, जिसमें अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के प्रमुख सचिव व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए थे। उस समय न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि नियुक्ति में देरी का शपथपत्र में कोई उचित कारण नहीं बताया गया है। अपर महाधिवक्ता के अनुरोध पर न्यायालय ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया था, यह अपेक्षा करते हुए कि इस अवधि में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। हालांकि, सरकार की ओर से कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी सभी लंबित आवेदनों पर एक साथ विचार करना चाहता है। जनवरी 2026 से अब तक 12 और आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इस दलील पर न्यायालय ने कहा कि यह 20 जुलाई को दिए गए आश्वासन के बावजूद कार्रवाई न किए जाने में हुई देरी को उचित ठहराने का प्रयास है। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह सरकार के आश्वासन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर को होगी।
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