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देवरिया में बुधवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ की जिला इकाई के तत्वावधान में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और रसोइयों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा समेत 11 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाई। डीआईओएस के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। संघ के जिलाध्यक्ष राजन कुमार पाण्डेय ने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर डीआईओएस को अलग पत्र सौंपा। जिला विद्यालय निरीक्षक ने मौके पर पहुंचकर ज्ञापन स्वीकार किया और एक सप्ताह के भीतर स्थानीय समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। कैशलेस चिकित्सा सुविधा और नियमितीकरण की मांग प्रदेश उपाध्यक्ष एवं धरने के मुख्य अतिथि वेद प्रकाश द्विवेदी ने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और रसोइयों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग की। मंडल अध्यक्ष जेलर सिंह ने भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा को कर्मचारियों की प्रमुख जरूरत बताया। मंडल उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह और शुभम शुक्ला ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने तथा योग्य शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति देने की मांग रखी। जिला मंत्री राजीव कुमार गुप्ता ने विद्यालय प्रबंध समितियों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षकों की तरह प्रतिनिधित्व देने की बात कही।
वेतन विसंगति दूर करने और अवकाश नकदीकरण की मांग जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने वेतनवृद्धि और नियम 22-बी का लाभ देने की मांग की। जिला उपमंत्री जगन्नाथ यादव ने सेवानिवृत्ति पर अवकाश नकदीकरण की मांग रखी, जबकि जिला उपाध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव ने वेतन विसंगति दूर करने की बात कही। ज्ञापन में प्रबंध समितियों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व, पदोन्नति पर नियम 22-बी के तहत वेतनवृद्धि का लाभ और शिक्षकों की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए राष्ट्रपति व राज्य पुरस्कार की व्यवस्था करने की मांग भी शामिल रही।
बंद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग जिला उपाध्यक्ष अभिषेक त्रिपाठी ने माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बंद नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की। संघर्ष समिति के सह संयोजक घनश्याम यादव ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में सीसीसी डिप्लोमा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग रखी। धरने का संचालन जिला संयुक्त मंत्री मो. शकील वारसी ने किया। इस दौरान जिला संगठन के पदाधिकारियों के साथ जिले के माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारी, आउटसोर्सिंग कर्मचारी और रसोइया बड़ी संख्या में मौजूद रहे। 11 सूत्रीय मांगों में पुरानी पेंशन भी संघ की ओर से भेजे गए ज्ञापन में 11 प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें अर्हताधारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति शुरू करना, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और नियमितीकरण तथा कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रमुख हैं। इसके अलावा 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन, सेवानिवृत्ति पर 300 दिन के उपार्जित अवकाश का नकदीकरण, सीसीसी की अनिवार्यता समाप्त करना, लिपिकों की वेतन विसंगति दूर करना और रोके गए विभिन्न भत्तों को बहाल करने की मांग की गई।
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