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एटीएम से रुपये निकालने पहुंचे हैं… खाते से रकम कट गई, लेकिन कैश बाहर नहीं आया। ऐसे में एटीएम केबिन में रखा एक विजिटिंग कार्ड नजर आता था। उस पर एसबीआई का नाम और हेल्पलाइन नंबर लिखा था। ग्राहक बेफिक्र होकर नंबर मिलाता और दूसरी तरफ से खुद को बैंक अधिकारी बताने वाला शख्स उसे दूसरे एटीएम पर जाने की सलाह देता। ग्राहक जैसे ही वहां से निकलता, कुछ ही पलों में एटीएम की कैश ट्रे में फंसी रकम गायब हो जाती।
सिविल लाइंस पुलिस ने इसी शातिर तरीके से एटीएम फ्रॉड करने वाले तोएफ खां उर्फ शोएब उर्फ मियां (23) को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया है। प्रतापगढ़ के लीलापुर क्षेत्र का रहने वाला तोएफ 2025 में फतेहपुर के थरियांव में नौ लाख रुपये की लूट के मामले में वह तीन साथियों के साथ जेल जा चुका है। इस मामले में उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लगा था।
प्लास्टिक की दफ्ती थी पूरे खेल की ‘चाबी’
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अर्टिगा कार से घूम-घूमकर एटीएम तलाशते थे। एटीएम में पहुंचकर रुपये निकलने वाली कैश ट्रे में एक खास आकार की प्लास्टिक की दफ्ती फंसा देते थे। इसके बाद ग्राहक के लिए मुश्किल शुरू होती और उनके लिए कमाई का रास्ता मिल जाता था।
ग्राहक रकम निकालता तो खाते से पैसे कट जाते, लेकिन कैश ट्रे में फंसी दफ्ती के कारण नोट बाहर नहीं आते। ग्राहक को लगता कि मशीन में खराबी है। यहीं से आरोपी का अगला दांव शुरू होता था।
एटीएम में छोड़ जाते थे ‘फर्जी हेल्पलाइन नंबर’
आरोपी पहले ही एटीएम केबिन में ऐसे विजिटिंग कार्ड रख देते थे, जिन पर एसबीआई का नाम और फर्जी हेल्पलाइन नंबर लिखा होता था। ग्राहक परेशान होकर उसी नंबर पर फोन करता।
फोन आरोपी का साथी उठाता और बैंक अधिकारी बनकर बात करता। वह ग्राहक को भरोसे में लेकर कहता कि दूसरे एटीएम पर जाए और वहां मौजूद गार्ड को साथ लेकर वापस आए।
ग्राहक के जाते ही आरोपी एटीएम में पहुंचता, प्लास्टिक की दफ्ती निकालता और कैश ट्रे में फंसे रुपये लेकर फरार हो जाता था।
रकम लेकर निकल जाते थे आरोपी
इस पूरे खेल में सबसे खास बात यह थी कि ग्राहक को आखिरी क्षण तक यही लगता था कि वह बैंक की मदद लेने जा रहा है। वह गार्ड की तलाश में दूसरे एटीएम की तरफ निकलता और इधर आरोपी उसी एटीएम में लौटकर अपना काम पूरा कर देता।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि इसी तरीके से उसने कुछ महीने पहले तेलंगाना में भी वारदात की थी।
कैश ही नहीं, कार्ड भी निशाने पर
आरोपी और उसके साथी केवल एटीएम की कैश ट्रे में फंसी रकम नहीं उड़ाते थे। वे एटीएम कार्ड बदलकर भी ठगी करते थे। ग्राहक का कार्ड बदलने के बाद उसके खाते से जुड़े कार्ड का इस्तेमाल ऑनलाइन खरीदारी में किया जाता था।
पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि उसे महंगे कपड़े और जूते पहनने का शौक है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने ठगी और चोरी से जुटाए पैसों से क्या-क्या खरीदा।
28 कार्ड देखकर पुलिस भी हैरान
सिविल लाइंस पुलिस ने 12 अगस्त की रात करीब 2:40 बजे बीएचएस के पीछे वाले गेट से 50 कदम आगे आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके पास से अलग-अलग बैंकों के 28 एटीएम कार्ड मिले।
इनमें एसबीआई के आठ, इंडियन बैंक के चार, बैंक ऑफ बड़ौदा के तीन और यूनियन बैंक के दो कार्ड समेत कई अन्य बैंकों के कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा नौ फर्जी हेल्पलाइन नंबर वाले विजिटिंग कार्ड, तीन प्लास्टिक की दफ्तियां, दो मोबाइल फोन, प्लास और पेचकस भी बरामद हुए। वारदात में इस्तेमाल अर्टिगा कार भी पुलिस ने कब्जे में ले ली है।
पुलिस अब खंगाल रही गैंग का नेटवर्क
आरोपी की गिरफ्तारी थाना प्रभारी रामाश्रय यादव के नेतृत्व में सिविल लाइंस पुलिस टीम ने की। पुलिस अब उसके साथियों की तलाश के साथ ही यह पता लगाने में जुटी है कि प्रयागराज और दूसरे राज्यों में इस गिरोह ने कितने एटीएम को निशाना बनाया। यह भी बात सामने आई है कि आरोपी और उसके साथियों ने कुछ दिन पहले तेलंगाना में भी ऐसी ही वारदात अंजाम दी थी।
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