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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन के चुनाव में महिलाओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह आरक्षण केवल कुछ चुनिंदा पदों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी पदों में 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ल की पीठ ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की सदस्य शशि मिश्रा की जनहित याचिका पर दिया। न्यायालय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत बार एसोसिएशनों की कार्यकारिणी और गवर्निंग काउंसिल में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। न्यायालय ने सुल्तानपुर बार एसोसिएशन के प्रस्तावित उपनियमों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि केवल कोषाध्यक्ष और कुछ गवर्निंग काउंसिल पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं था। महिलाओं के पद आरक्षित करने के निर्देश न्यायालय ने मौजूदा चुनाव में एक संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, महासचिव और एक उपाध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अध्यक्ष का पद वर्ष 2027 के चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। इन पदों पर हर तीसरे वर्ष रोटेशन के आधार पर महिला आरक्षण लागू रहेगा। इन निर्देशों के कारण, पहले से घोषित चुनाव कार्यक्रम को स्थगित कर नए सिरे से नामांकन कराना होगा। रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार समिति को आदेश के अनुसार चुनाव कार्यक्रम फिर से जारी करना होगा। न्यायालय ने 13 अगस्त को नया चुनाव कार्यक्रम पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित पद पर महिला का निर्वाचन नहीं होता या पद खाली रह जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार संबंधित प्रशासनिक न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश एक महिला सदस्य को नामित कर सकते हैं।
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