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चित्रकूट। सावन के दूसरे सोमवार को धर्मनगरी चित्रकूट में भगवान शिव की भक्ति में लाखों श्रद्धालु लीन रहे। मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित प्राचीन मत्स्यगजेंद्रनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। भक्तों ने बेलपत्र, धतूरा, फूल और दूध अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजता रहा। सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए लगभग 300 मीटर लंबी कतारें लगी थीं, जिसमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक थी। 4 तस्वीरें देखिए- मत्स्यगजेंद्रनाथ मंदिर की यह विशेषता है कि यहां एक साथ चार शिवलिंग विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी प्रदीप महाराज ने बताया कि सबसे पहले सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि की उत्पत्ति से पूर्व ब्रह्मा जी ने यहां यज्ञ किया था, जिसके बाद उन्होंने भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग स्थापना कर आराधना की थी। पुजारी के अनुसार, वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम भी चित्रकूट आए थे और उन्होंने अपने हाथों से यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यह भी मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग रामेश्वर शिवलिंग से भी पहले के हैं। यही कारण है कि सावन के सोमवार और अन्य प्रमुख पर्वों पर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु मत्स्यगजेंद्रनाथ मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन में मंदाकिनी में स्नान और भगवान मत्स्यगजेंद्रनाथ के दर्शन करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आस्था और भक्ति के इस संगम के चलते पूरे दिन मंदिर क्षेत्र में धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।
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