गाड़ी में बैठे गुरसिमरन मंड पर हमला करते हुए लोग। इनसेट में गुरसिमरन मंड की तस्वीर।
अंबाला के पंजोखरा साहिब में 7 अगस्त को खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हमला हुआ। मंड गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे, जहां विवाद के बाद भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में मंड समेत चार लोग घायल हुए, जबकि उनकी कार में भी तोड़फ
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मंड लंबे समय से पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। वे खालिस्तान के खिलाफ मुखर रुख के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तान टेररिस्ट फ्रंट बनाया और खुद को इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हैं।
पूर्व पीएम राजीव गांधी की प्रतिमा को पगड़ी से साफ करने की घटना के बाद मंड देशभर में चर्चा में आए थे। उन्हें समय-समय पर धमकियां मिलने और सुरक्षा को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। अब अंबाला में हुए हमले के बाद एक बार फिर मंड चर्चा में हैं। जानिए कौन हैं गुरसिमरन सिंह मंड और अब तक किन विवादों से जुड़ा रहा उनका सफर…

7 अगस्त को मंड पर हमला हुआ था, जिसमें वो खून से लथपथ हो गए थे।
अब विस्तार से पढ़िए कौन हैं मंड…
- लुधियाना में जन्मे मंड, चंडीगढ़ से BA: गुरसिमरन सिंह मंड का जन्म 19 अक्टूबर 1974 में लुधियाना में हुआ। उन्होंने स्कूली पढ़ाई मालवा सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। इसके बाद चंडीगढ़ से प्राइवेट तौर पर बीए की पढ़ाई की।मंड की 1997 में शादी हुई। उनका एक छोटा भाई है, जो अलग रहता है।
- दादा गांव के सरपंच रहे, मंड प्रॉपर्टी कारोबारी: मंड के परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। उनका बेटा उनके साथ ही काम करता है। वहीं बेटी ने हाल ही में बीए की पढ़ाई पूरी की है। उनके पिता मंजीत सिंह ईंट-भट्ठों का कारोबार करते थे, जबकि अब मंड खुद प्रॉपर्टी का कारोबार करते हैं। मंड के दादा भगवंत सिंह 1973 में भुट्टा गांव के सरपंच रहे थे। उनकी मां अमरजीत कौर का 2002 में निधन हो गया था।
- कांग्रेस में पद मिला, फिर निष्कासन झेला: मंड पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लोकल बॉडीज सेल के वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं। 2014 में पंजाब कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने उन्हें पांच अन्य नेताओं के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। कांग्रेस के मुताबिक, मंड और अन्य नेताओं ने तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ अभियान चलाया था। दिसंबर 2015 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनका निष्कासन वापस लिए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, 2016 में उनकी पार्टी सदस्यता को लेकर फिर विवाद हुआ।
- राजीव गांधी की प्रतिमा साफ करने से सुर्खियों में आए: मंड के राजनीतिक जीवन की सबसे चर्चित घटनाओं में 25 दिसंबर 2018 की घटना शामिल है। लुधियाना के सलेम टाबरी इलाके में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा पर यूथ अकाली दल के नेताओं ने काला रंग लगाया था। घटना की जानकारी मिलने पर मंड मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी पगड़ी उतारकर राजीव गांधी की प्रतिमा को साफ किया। बाद में प्रतिमा को दूध से भी साफ किया गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मंड को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा और कई सिख संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई।

पूर्व पीएम राजीव गांधी की प्रतिमा को पगड़ी से साफ करते हुए मंड।- फाइल फोटो
- 2021 में फिर जलाई गई राजीव गांधी की प्रतिमा: 7 जुलाई 2021 को सलेम टाबरी के पास राजीव गांधी की प्रतिमा को पेट्रोल डालकर आग लगाने का मामला सामने आया। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मंड दोबारा मौके पर पहुंचे और जली हुई प्रतिमा को अपनी पगड़ी से साफ किया। इस घटना के बाद मई 2022 में मंड के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में IPC की धारा 295-A के तहत मामला दर्ज किया गया।
- खालिस्तान विरोधी रुख से बनी अलग पहचान: कांग्रेस से जुड़े रहने के दौरान भी मंड लगातार खालिस्तान के खिलाफ आवाज उठाते रहे। बाद में उनकी पहचान पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग एक खालिस्तान विरोधी नेता के तौर पर बनने लगी। मंड ने इंटरनेशनल एंटी खालिस्तान टेररिस्ट फ्रंट बनाया। वे खुद को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हैं। आतंकवाद और खालिस्तान के खिलाफ उनके सार्वजनिक बयानों के चलते उन्हें पर धमकियां मिलने के मामले भी सामने आए।
- धमकियों के बाद सुरक्षा को लेकर भी चर्चा: 2021 में मंड की शिकायत पर सोशल मीडिया और वॉट्सएप के जरिए जान से मारने की धमकियों को लेकर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। 2024 में मंड की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। उस समय उन्हें वाई-प्लस सुरक्षा दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर उनके घर के बाहर हुए घटनाक्रम ने भी सुर्खियां बटोरी थीं।

भीड़ के आगे हाथ जोड़कर, पैर पकड़कर माफी मांगते दिखे गुरसिमरन सिंह मंड।
अब वो लेटेस्ट मामला, जिससे फिर सुर्खियों में मंड 7 अगस्त 2026 की शाम अंबाला के पंजोखरा साहिब में मंड पर हमला हुआ। वे गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंड की गाड़ी को गुरुद्वारा साहिब की ओर जाने वाले भीड़भाड़ वाले रास्ते पर ले जाने को लेकर कुछ श्रद्धालुओं ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद विवाद बढ़ा।
मंड ने अस्पताल से मीडिया को बताया कि बड़ी संख्या में लोगों ने उन पर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कट्टरपंथियों ने मुझे खालिस्तानी नारे लगाने को कहा था। जब मैंने मना किया तो मुझे मारने लगे। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
हमले में चार लोग घायल अंबाला पुलिस के मुताबिक, घटना में मंड, उनके साथ मौजूद लुधियाना के भावजोत और दो पुलिसकर्मी राकेश कुमार तथा कुलबीर राणा घायल हुए। मंड की कार को भी नुकसान पहुंचा। घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें कुछ युवक कथित तौर पर उनकी गाड़ी पर डंडों और ईंटों से हमला करते दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस से दूरी, अब भाजपा के समर्थन में नजर आते हैं मंड का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से उनकी दूरी बढ़ती गई। वे अब सोशल मीडिया पर भाजपा का समर्थन करते नजर आते हैं। मंड ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर ‘मां तुझे सलाम’ जैसे स्लोगन के साथ भी अपनी राजनीतिक पहचान को सामने रखा है। कांग्रेस की राजनीति से निकले मंड की पहचान बाद में खालिस्तान विरोधी नेता के तौर पर बनी। मंड ने बताया कि वह धमकियाों को लेकर 12 के करीब FIR दर्ज करा चुके हैं।
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हरियाणा के अंबाला में हुई मारपीट पर लुधियाना के हिंदू नेता गुरसिमरन सिंह मंड का नया वीडियो सामने आया है। अस्पताल में भर्ती मंड ने कहा- कट्टरपंथियों ने मुझे खालिस्तानी नारे लगाने को कहा था। जब मैंने मना किया तो मुझे मारने लगे। मेरी कार पर चढ़कर तलवार-डंडों से हमला किया गया। (पढ़ें पूरी खबर)